Hope Poetry (page 86)
ग़ैज़ का सूरज था सर पर सच को सच कहता तो कौन
एहतराम इस्लाम
बज़्म-ए-तन्हाई में अक्स-ए-शो'ला-पैकर था कोई
एहतराम इस्लाम
रिश्ते की सच्चाई
एहसान साक़िब
ज़ख़्मों को मेरे दिल के सजाओ तो बने बात
एहसान जाफ़री
तुम अच्छे मसीहा हो दवा क्यूँ नहीं देते
एहसान जाफ़री
शायद अभी बाक़ी है कुछ आग मोहब्बत की
एहसान दरबंगावी
ख़याल के फूल खिल रहे हैं बहार के गीत गा रहा हूँ
एहसान दरबंगावी
ज़ब्त भी सब्र भी इम्कान में सब कुछ है मगर
एहसान दानिश
शोरिश-ए-इश्क़ में है हुस्न बराबर का शरीक
एहसान दानिश
ख़ाक से सैंकड़ों उगे ख़ुर्शीद
एहसान दानिश
कौन देता है मोहब्बत को परस्तिश का मक़ाम
एहसान दानिश
दिल की शगुफ़्तगी के साथ राहत-ए-मय-कदा गई
एहसान दानिश
यूँ उस पे मिरी अर्ज़-ए-तमन्ना का असर था
एहसान दानिश
वफ़ाएँ कर के जफ़ाओं का ग़म उठाए जा
एहसान दानिश
वफ़ा का अहद था दिल को सँभालने के लिए
एहसान दानिश
तौबा की नाज़िशों पे सितम ढा के पी गया
एहसान दानिश
सोज़-ए-जुनूँ को दिल की ग़िज़ा कर दिया गया
एहसान दानिश
रंग-ए-तहज़ीब-ओ-तमद्दुन के शनासा हम भी हैं
एहसान दानिश
रहे जो ज़िंदगी में ज़िंदगी का आसरा हो कर
एहसान दानिश
परस्तिश-ए-ग़म का शुक्रिया क्या तुझे आगही नहीं
एहसान दानिश
नज़र फ़रेब-ए-क़ज़ा खा गई तो क्या होगा
एहसान दानिश
न सियो होंट न ख़्वाबों में सदा दो हम को
एहसान दानिश
मिरे मिटाने की तदबीर थी हिजाब न था
एहसान दानिश
मौसम से रंग-ओ-बू हैं ख़फ़ा देखते चलो
एहसान दानिश
जो ले के उन की तमन्ना के ख़्वाब निकलेगा
एहसान दानिश
जीने के लिए जो मर रहे हैं
एहसान दानिश
इश्क़ को तक़लीद से आज़ाद कर
एहसान दानिश
इश्क़ की दुनिया में इक हंगामा बरपा कर दिया
एहसान दानिश
हंगामा-ए-ख़ुदी से तू बे-नियाज़ हो जा
एहसान दानिश
बख़्श दी हाल-ए-ज़बूँ ने जल्वा-सामानी मुझे
एहसान दानिश