Hope Poetry (page 88)

चोर-साहिब से दरख़्वास्त

दिलावर फ़िगार

चालीस चोर

दिलावर फ़िगार

अहमक़ों की कांफ्रेंस

दिलावर फ़िगार

ज़हर बीमार को मुर्दे को दवा दी जाए

दिलावर फ़िगार

मैं ने कहा कि शहर के हक़ में दुआ करो

दिलावर फ़िगार

हुस्न पर ए'तिबार हद कर दी

दिलावर फ़िगार

वही सितारा-नुमा इक चराग़ है 'आज़र'

दिलावर अली आज़र

बदन को छोड़ ही जाना है रूह ने 'आज़र'

दिलावर अली आज़र

सात दरियाओं का पानी है मिरे कूज़े में

दिलावर अली आज़र

मंज़र से उधर ख़्वाब की पस्पाई से आगे

दिलावर अली आज़र

मैं सुर्ख़ फूल को छू कर पलटने वाला था

दिलावर अली आज़र

ख़ुद अपनी आग में सारे चराग़ जलते हैं

दिलावर अली आज़र

हवस से जिस्म को दो-चार करने वाली हवा

दिलावर अली आज़र

दरून-ए-ख़्वाब नया इक जहाँ निकलता है

दिलावर अली आज़र

बना रहा था कोई आब ओ ख़ाक से कुछ और

दिलावर अली आज़र

'आज़र' रहा है तेशा मिरे ख़ानदान में

दिलावर अली आज़र

ये भीगी रात ये ठंडा समाँ ये कैफ़-ए-बहार

दिल शाहजहाँपुरी

असर-ए-इश्क़ से हूँ सूरत-ए-शम्अ ख़ामोश

दिल शाहजहाँपुरी

आरज़ू लुत्फ़ तलब इश्क़ सरासर नाकाम

दिल शाहजहाँपुरी

तमकीं है और हुस्न-ए-गरेबाँ है और हम

दिल शाहजहाँपुरी

फिर ए'तिबार-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहा

दिल शाहजहाँपुरी

मायूस-ए-अज़ल हूँ ये माना नाकाम-ए-तमन्ना रहना है

दिल शाहजहाँपुरी

मय-ए-कौसर का असर चश्म-ए-सियह-फ़ाम में है

दिल शाहजहाँपुरी

क्या कहिए दास्तान-ए-तमन्ना बदल गई

दिल शाहजहाँपुरी

कूचा-गर्दी में जवानी जाएगी

दिल शाहजहाँपुरी

कूचा-गर्दी में जवानी जाएगी

दिल शाहजहाँपुरी

रह गया ख़्वाब-ए-दिल-आराम अधूरा किस का

दिल अय्यूबी

फिर मरहला-ए-ख़्वाब-ए-बहाराँ से गुज़र जा

दिल अय्यूबी

हसीं है शहर तो उजलत में क्यूँ गुज़र जाएँ

दिल अय्यूबी

अदा-ए-हैरत-ए-आईना-गर भी रखते हैं

दिल अय्यूबी