Hope Poetry (page 89)
ज़िंदगी इस तरह गुज़ारी है
धीरेंद्र सिंह फ़य्याज़
तेरा क्या जाता जो मिलता जाम-ए-रेहानी मुझे
धनपत राय थापर राज़
शोर-ए-अतश जो फूलों की हर अंजुमन में है
धनपत राय थापर राज़
उदासी के मंज़र मकानों में हैं
देवमणि पांडेय
कश्तियाँ मंजधार में हैं नाख़ुदा कोई नहीं
देवमणि पांडेय
इस जहाँ में प्यार महके ज़िंदगी बाक़ी रहे
देवमणि पांडेय
सुनहरी मछली
दीप्ति मिश्रा
डाइरी
दीप्ति मिश्रा
चाहत
दीप्ति मिश्रा
वो नहीं मेरा मगर उस से मोहब्बत है तो है
दीप्ति मिश्रा
दोनों में कितना फ़र्क़ मगर दोनों का हासिल तन्हाई
दीप्ति मिश्रा
अजब कश्मकश है अजब है कशाकश ये क्या बीच में है हमारे तुम्हारे
दीप्ति मिश्रा
पीने दें मय-कशों को जहाँ भी पिया करें
दीपक शर्मा दीप
आसानी में जीने में तो ख़र्चा लगता है
दीपक शर्मा दीप
नज़र आया न कोई भी इधर देखा उधर देखा
दीपक क़मर
कुछ नहीं खुलता इब्तिदा क्या है
दीद राही
ज़िंदगी क्या है इब्तिला के सिवा
द्वारका दास शोला
ज़रा निगाह उठाओ कि ग़म की रात कटे
द्वारका दास शोला
मेरी मंज़िल कहाँ है क्या मा'लूम
द्वारका दास शोला
दिल-ए-बे-मुद्दआ का मुद्दआ' क्या
द्वारका दास शोला
देख जुर्म-ओ-सज़ा की बात न कर
द्वारका दास शोला
अपनों के सितम याद न ग़ैरों की जफ़ा याद
द्वारका दास शोला
उम्मीद
दाऊद ग़ाज़ी
सौग़ात
दाऊद ग़ाज़ी
रूह-ए-आवारा
दाऊद ग़ाज़ी
जवाज़
दाऊद ग़ाज़ी
इल्म
दाऊद ग़ाज़ी
दिया उस ख़ुश-नयन ने रात कूँ मुझ कूँ सुराग़ अपना
दाऊद औरंगाबादी
सीना साफ़ी सूँ मिस्ल-ए-दर्पन कर
दाऊद औरंगाबादी
मुझ साथ सैर-ए-बाग़ कूँ ऐ नौ-बहार चल
दाऊद औरंगाबादी