Hope Poetry (page 87)
अपनी रुस्वाई का एहसास तो अब कुछ भी नहीं
एहसान दानिश
अब कहो कारवाँ किधर को चले
एहसान दानिश
आया नहीं है राह पे चर्ख़-ए-कुहन अभी
एहसान दानिश
उम्मीद पर हमारी ये दुनिया खरी नहीं
डॉक्टर आज़म
जो अना की सिफ़त है ज़ाती है
डॉक्टर आज़म
दिल मिरा चीख़ रहा था शायद
डॉक्टर आज़म
बिकेगी उस की ही दस्तार तय है
डॉक्टर आज़म
इस शहर-ए-निगाराँ की कुछ बात निराली है
दिवाकर राही
सब्र के दरिया में जब आ जाएगा
दिनेश ठाकुर
क्या किसी की तलब नहीं होती
दिनेश ठाकुर
आइने से कब तलक तुम अपना दिल बहलाओगे
दिनेश ठाकुर
ज़माने ठीक है इन से बहुत हुए रौशन
दिनेश नायडू
रात से दिन का वो जो रिश्ता थी
दिनेश नायडू
पूछता कौन वफ़ा से उस की
दिनेश नायडू
जो भी निकले तिरी आवाज़ लगाता निकले
दिनेश नायडू
दोस्तो तुम ने भी देखी है वो सूरत वो शबीह
दिलकश सागरी
चाँद भी सितारों को साथ ले के चलता है
दिलकश सागरी
मैं ने जब से चाहत के जुगनुओं को पाला है
दिलदार हाश्मी
वस्ल की रात जो महबूब कहे गुड नाईट
दिलावर फ़िगार
शायर-ए-आज़म
दिलावर फ़िगार
शदीद गरमी के मौसम में मुशाइरा
दिलावर फ़िगार
मर्दुम-गज़ीदा इंसान का इलाज
दिलावर फ़िगार
लंदन में जश्न-ए-ग़ालिब
दिलावर फ़िगार
लैला मजनूँ की शादी
दिलावर फ़िगार
लग गए हैं फ़ोन लगने में जो पच्चीस साल
दिलावर फ़िगार
कराची की बस
दिलावर फ़िगार
कहा लैला की माँ ने
दिलावर फ़िगार
इश्क़ का परचा
दिलावर फ़िगार
'ग़ालिब' को बुरा क्यूँ कहो
दिलावर फ़िगार
इलिएट्स-गर्ल्स-कॉलेज और कुल पाक ओ हिन्द मुशाएरा
दिलावर फ़िगार