Hope Poetry (page 91)
बहुत मुश्किल है तर्क-ए-आरज़ू रब्त-आश्ना हो कर
दर्शन सिंह
आज दिल से दुआ करे कोई
दर्शन सिंह
तमन्ना तिरी है अगर है तमन्ना
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
सैर-ए-बहार-ए-बाग़ से हम को मुआ'फ़ कीजिए
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
ने गुल को है सबात न हम को है ए'तिबार
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
काश उस के रू-ब-रू न करें मुझ को हश्र में
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
हर-चंद तुझे सब्र नहीं दर्द व-लेकिन
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
'दर्द' के मिलने से ऐ यार बुरा क्यूँ माना
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
क़त्ल-ए-आशिक़ किसी माशूक़ से कुछ दूर न था
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
मिरा जी है जब तक तिरी जुस्तुजू है
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
हम तुझ से किस हवस की फ़लक जुस्तुजू करें
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
चमन में सुब्ह ये कहती थी हो कर चश्म-ए-तर शबनम
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
मैं नफ़ी में
दानियाल तरीर
शहर से क्या गई जानिब-ए-दश्त-ए-ज़र ज़िंदगी फ़ाख़्ता
दानियाल तरीर
कोई सिवा-ए-बदन है न है वरा-ए-बदन
दानियाल तरीर
चश्म-ए-वा ही न हुई जल्वा-नुमा क्या होता
दानियाल तरीर
ब-तर्ज़-ए-ख़्वाब सजानी पड़ी है आख़िर-कार
दानियाल तरीर
साक़ी मुझे शबाब का रसिया कहे सो हूँ
दानिश नज़ीर दानी
कहानी एक रात की
दानिश फ़राज़ी
सितम के बा'द भी बाक़ी करम की आस तो है
दानिश फ़राही
न वो ताएरों का जमघट न वो शाख़-ए-आशियाना
दानिश फ़राही
न सोचें अहल-ए-ख़िरद मुझ को आज़माने को
दानिश फ़राही
किस क़दर इज़्तिराब है यारो
दानिश फ़राही
दुआ हमारी कभी बा-असर नहीं होती
दानिश फ़राही
दिल था बे-कैफ़ मोहब्बत की ख़ता से पहले
दानिश फ़राही
वाइज़ तू अगर उन के कूचे से गुज़र जाए
दानिश अलीगढ़ी
बुलंद ज़ीस्त का अपनी वक़ार हो न सका
दामोदर ठाकुर ज़की
वो जाते हैं आती है क़यामत की सहर आज
दाग़ देहलवी
ना-उमीदी बढ़ गई है इस क़दर
दाग़ देहलवी
ख़ार-ए-हसरत बयान से निकला
दाग़ देहलवी