Hope Poetry (page 92)
जो तुम्हारी तरह तुम से कोई झूटे वादे करता
दाग़ देहलवी
इस लिए वस्ल से इंकार है हम जान गए
दाग़ देहलवी
हज़ार बार जो माँगा करो तो क्या हासिल
दाग़ देहलवी
ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया
दाग़ देहलवी
फ़सुर्दा-दिल कभी ख़ल्वत न अंजुमन में रहे
दाग़ देहलवी
दिल ही तो है न आए क्यूँ दम ही तो है न जाए क्यूँ
दाग़ देहलवी
डरता हूँ देख कर दिल-ए-बे-आरज़ू को मैं
दाग़ देहलवी
अयादत को मिरी आ कर वो ये ताकीद करते हैं
दाग़ देहलवी
अयादत को मिरी आ कर वो ये ताकीद करते हैं
दाग़ देहलवी
आप का ए'तिबार कौन करे
दाग़ देहलवी
ज़ाहिद न कह बुरी कि ये मस्ताने आदमी हैं
दाग़ देहलवी
ये बात बात में क्या नाज़ुकी निकलती है
दाग़ देहलवी
वो ज़माना नज़र नहीं आता
दाग़ देहलवी
उज़्र उन की ज़बान से निकला
दाग़ देहलवी
उस के दर तक किसे रसाई है
दाग़ देहलवी
उस से क्या ख़ाक हम-नशीं बनती
दाग़ देहलवी
उन के इक जाँ-निसार हम भी हैं
दाग़ देहलवी
तुम आईना ही न हर बार देखते जाओ
दाग़ देहलवी
तमाशा-ए-दैर-ओ-हरम देखते हैं
दाग़ देहलवी
सब लोग जिधर वो हैं उधर देख रहे हैं
दाग़ देहलवी
रंज की जब गुफ़्तुगू होने लगी
दाग़ देहलवी
पुकारती है ख़मोशी मिरी फ़ुग़ाँ की तरह
दाग़ देहलवी
फिरे राह से वो यहाँ आते आते
दाग़ देहलवी
फिर शब-ए-ग़म ने मुझे शक्ल दिखाई क्यूँकर
दाग़ देहलवी
पयामी कामयाब आए न आए
दाग़ देहलवी
ना-रवा कहिए ना-सज़ा कहिए
दाग़ देहलवी
मुमकिन नहीं कि तेरी मोहब्बत की बू न हो
दाग़ देहलवी
मुझ सा न दे ज़माने को परवरदिगार दिल
दाग़ देहलवी
मोहब्बत में आराम सब चाहते हैं
दाग़ देहलवी
ले चला जान मिरी रूठ के जाना तेरा
दाग़ देहलवी