Hope Poetry (page 94)
मोहब्बत की गली से हम जहाँ हो कर निकल आए
चित्रांश खरे
काएनात-ए-आरज़ू में हम बसर करने लगे
चित्रांश खरे
जो मेरी छत का रस्ता चाँद ने देखा नहीं होता
चित्रांश खरे
हमारे सब्र का इक इम्तिहान बाक़ी है
चित्रांश खरे
दोनों की आरज़ू में चमक बरक़रार है
चित्रांश खरे
या-रब ग़म-ए-हिज्राँ में इतना तो किया होता
चराग़ हसन हसरत
उम्मीद तो बंध जाती तस्कीन तो हो जाती
चराग़ हसन हसरत
उमीद-ए-वस्ल ने धोके दिए हैं इस क़दर 'हसरत'
चराग़ हसन हसरत
इस तरह कर गया दिल को मिरे वीराँ कोई
चराग़ हसन हसरत
या-रब ग़म-ए-हिज्राँ में इतना तो किया होता
चराग़ हसन हसरत
मोहब्बत किस क़दर यास-आफ़रीं मालूम होती है
चराग़ हसन हसरत
इस तरह कर गया दिल को मिरे वीराँ कोई
चराग़ हसन हसरत
दिल बला से निसार हो जाए
चराग़ हसन हसरत
तन्हाई में आज उन से मुलाक़ात हुई है
चरख़ चिन्योटी
क़रार खो के चले बे-क़रार हो के चले
चरख़ चिन्योटी
क़रार खो के चले बे-क़रार हो के चले
चरख़ चिन्योटी
हुस्न के जल्वे लुटाए तिरी रा'नाई ने
चरख़ चिन्योटी
फ़ज़ा-ए-ना-उमीदी में उमीद-अफ़ज़ा पयाम आया
चरख़ चिन्योटी
अक़्ल हैरान है रहमत का तक़ाज़ा क्या है
चरख़ चिन्योटी
सर उठा के मत चलिए आज के ज़माने में
चरण सिंह बशर
लाख कुछ न हम कहते बे-ज़बाँ रहे होते
चरण सिंह बशर
एक मरकज़ पे सिमट आई है सारी दुनिया
चरण सिंह बशर
समंदर का सुकूत
चन्द्रभान ख़याल
क़तरा क़तरा एहसास
चन्द्रभान ख़याल
लौट चलिए
चन्द्रभान ख़याल
सभी सम्तों को ठुकरा कर उड़ी जाए
चंद्र प्रकाश शाद
कैसा वो मौसम था ये तो समझ न पाए हम
चंद्र प्रकाश शाद
हर इक इम्कान तक पस्पाई है अपनी
चंद्र प्रकाश शाद
ये मोहब्बत जो मोहब्बत से कमाई हुई है
चाँदनी पांडे
वो काश मान लेता कभी हम-सफ़र मुझे
चाँदनी पांडे