Hope Poetry (page 96)
मिरी रात मेरा चराग़ मेरी किताब दे
बुशरा एजाज़
मंज़रों के दरमियाँ मंज़र बनाना चाहिए
बुशरा एजाज़
दिल में है तलब और दुआ और तरह की
बुशरा एजाज़
संग को छोड़ के तू ने कभी सोचा ही नहीं
बबल्स होरा सबा
पास होने का इशारा मिल गया
बबल्स होरा सबा
ख़ुद को तमाशा ख़ूब बनाता रहा हूँ मैं
बबल्स होरा सबा
बे-रुख़ी ने उस की कैसा ये इशारा कर दिया
बबल्स होरा सबा
बे-क़रारी दिल-ए-मुज़्तर की बढ़ाई हम ने
बबल्स होरा सबा
यही समझा हूँ बस इतनी हुई है आगही मुझ को
ब्रहमा नन्द जलीस
तुझ से तसव्वुरात में ऐ जान-ए-आरज़ू
ब्रहमा नन्द जलीस
होती नहीं रसाई-ए-बर्क़-ए-तपाँ कहाँ
ब्रहमा नन्द जलीस
ऐ 'जलीस' अब इक तुम्हीं में आदमियत हो तो हो
ब्रहमा नन्द जलीस
जब ख़िज़ाँ आई चमन में सब दग़ा देने लगे
बूम मेरठी
इस क़दर बढ़ गई वहशत तिरे दीवाने की
बूम मेरठी
अल्लाह अल्लाह वस्ल की शब इस क़दर ए'जाज़ है
बूम मेरठी
अगर दुश्मन की थोड़ी सी मरम्मत और हो जाती
बूम मेरठी
वही होती है रहबर जो तमन्ना दिल में होती है
बिस्मिल सईदी
सर जिस पे न झुक जाए उसे दर नहीं कहते
बिस्मिल सईदी
कौन समझे इश्क़ की दुश्वारियाँ
बिस्मिल सईदी
हैराँ हूँ कि अब लाऊँ कहाँ से मैं ज़बाँ और
बिस्मिल साबरी
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
बिस्मिल अज़ीमाबादी
सारी उम्मीद रही जाती है
बिस्मिल अज़ीमाबादी
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
बिस्मिल अज़ीमाबादी
मेरी दुआ कि ग़ैर पे उन की नज़र न हो
बिस्मिल अज़ीमाबादी
ख़िज़ाँ के जाने से हो या बहार आने से
बिस्मिल अज़ीमाबादी
कहाँ आया है दीवानों को तेरा कुछ क़रार अब तक
बिस्मिल अज़ीमाबादी
ये कैसी आग अभी ऐ शम्अ तेरे दिल में बाक़ी है
बिस्मिल इलाहाबादी
उन से कह दो कि इलाज-ए-दिल-ए-शैदा न करें
बिस्मिल इलाहाबादी
साज़-ए-हस्ती का अजब जोश नज़र आता है
बिस्मिल इलाहाबादी
जीने वाला ये समझता नहीं सौदाई है
बिस्मिल इलाहाबादी