Hope Poetry (page 95)
उम्र के लम्बे सफ़र से तजरबा ऐसा मिला
चाँदनी पांडे
जले चराग़ बुझाने की ज़िद नहीं करते
चाँदनी पांडे
हमें बर्बादियों पे मुस्कुराना ख़ूब आता है
चाँदनी पांडे
नई-देहली
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
जहाँ रंग-ओ-बू है और मैं हूँ
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
हर आरज़ू में रंग है बाग़-ओ-बहार का
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
फ़ित्ना-ए-रोज़गार की बातें
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
देते हैं मेरे जाम में देखें शराब कब
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
चराग़ क़ौम का रौशन है अर्श पर दिल के
चकबस्त ब्रिज नारायण
रामायण का एक सीन
चकबस्त ब्रिज नारायण
मर्सिया गोपाल कृष्ण गोखले
चकबस्त ब्रिज नारायण
ख़ाक-ए-हिंद
चकबस्त ब्रिज नारायण
हुब्ब-ए-क़ौमी
चकबस्त ब्रिज नारायण
हमारा वतन दिल से प्यारा वतन
चकबस्त ब्रिज नारायण
ज़बाँ को बंद करें या मुझे असीर करें
चकबस्त ब्रिज नारायण
नए झगड़े निराली काविशें ईजाद करते हैं
चकबस्त ब्रिज नारायण
न कोई दोस्त दुश्मन हो शरीक-ए-दर्द-ओ-ग़म मेरा
चकबस्त ब्रिज नारायण
कुछ ऐसा पास-ए-ग़ैरत उठ गया इस अहद-ए-पुर-फ़न में
चकबस्त ब्रिज नारायण
फ़ना का होश आना ज़िंदगी का दर्द-ए-सर जाना
चकबस्त ब्रिज नारायण
अगर दर्द-ए-मोहब्बत से न इंसाँ आश्ना होता
चकबस्त ब्रिज नारायण
शिकन-अंदर-शिकन याद आ गया है
बुशरा ज़ैदी
सवाद-ए-शाम से डरता हुआ नज़र आया
बुशरा ज़ैदी
अर्सा हुआ किसी ने पुकारा नहीं मुझे
बुशरा हाश्मी
अभी बादलों का सफ़र कहाँ मिरे मेहरबाँ
बुशरा हाश्मी
आँखों को अब निगाह की आदत नहीं रही
बुशरा हाश्मी
मिरी अपनी और उस की आरज़ू में फ़र्क़ ये था
बुशरा एजाज़
उन्हें ढूँडो
बुशरा एजाज़
तुम्हारी चुप मिरा आईना है
बुशरा एजाज़
मेरे ख़ामोश ख़ुदा
बुशरा एजाज़
मोहब्बत में कोई सदमा उठाना चाहिए था
बुशरा एजाज़