Love Poetry (page 100)
दर्द की कौन सी मंज़िल से गुज़रते होंगे
ग़ज़नफ़र
अपनी नज़र में भी तो वो अपना नहीं रहा
ग़ज़नफ़र
सूरज को क्या पता है किधर धूप चाहिए
ग़यास मतीन
जज़ीरे हों कि वो सहरा हों ख़्वाब होना है
ग़यास मतीन
धूप का एहसास जाने क्यूँ उसे होता नहीं
ग़यास मतीन
तुझे मैं भूल जाना चाहता हूँ
ग़यास अंजुम
लिपट रही हैं जो तुझ से दुआएँ मेरी हैं
ग़यास अंजुम
ख़सारे में रहे लेकिन न छोड़ी सादगी हम ने
ग़यास अंजुम
हुजूम-ए-दर्द मिला इम्तिहान ऐसा था
ग़यास अंजुम
दर्द के चाँद की तस्वीर ग़ज़ल में आए
ग़यास अंजुम
छुपा है कर्ब-ए-मुसलसल हवा के लहजे में
ग़यास अंजुम
बे-नियाज़-ए-बहार सा क्यूँ है
ग़यास अंजुम
पिया ख़मोश है मेरा
ग़ौसिया ख़ान सबीन
मुख़्तसर सी बात को भी मसअला कहते रहे
ग़ौसिया ख़ान सबीन
इक सर्द-जंग का है असर मेरे ख़ून में
ग़ौसिया ख़ान सबीन
अभी देखी कहाँ हैं आप ने सब ख़ूबियाँ मेरी
ग़ौसिया ख़ान सबीन
आँखों में हया रख के भी बेबाक बहुत थे
ग़ौसिया ख़ान सबीन
आँधी में भी चराग़ मगन है सबा के साथ
ग़ौसिया ख़ान सबीन
तुम्हारे शहर में आँगन नहीं है
ग़ौस सीवानी
कैसा होगा देस पिया का कैसा पिया का गाँव रे
ग़ौस सीवानी
दिल की नय्या दो नैनों के मोह में डूबी जाए
ग़ौस सीवानी
भीगी भीगी बरखा रुत के मंज़र गीले याद करो
ग़ौस सीवानी
न होते शाद आईन-ए-गुलिस्ताँ देखने वाले
ग़ौस मोहम्मद ग़ौसी
ग़ुरूर-ए-नाज़ दिखा तुझ में कितना जौहर है
ग़ौस मोहम्मद ग़ौसी
अब तो ख़ुद से भी कुछ ऐसा है बशर का रिश्ता
ग़ौस मोहम्मद ग़ौसी
तुम्हें ख़बर भी है ये तुम ने किस से क्या माँगा
ग़नी एजाज़
कोई हमराह नहीं राह की मुश्किल के सिवा
ग़नी एजाज़
ख़्वाहिशें अपनी सराबों में न रक्खे कोई
ग़नी एजाज़
जुनूँ में देर से ख़ुद को पुकारता हूँ मैं
ग़नी एजाज़
बिजली की ज़द में एक मिरा आशियाँ नहीं
ग़नी एजाज़