Love Poetry (page 99)

इक हुजूम-ए-ग़म-ओ-कुलफ़त है ख़ुदा ख़ैर करे

ग़ुलाम भीक नैरंग

पुराने जूते

ग़ुलाम अहमद फ़रीद

कोई जुगनू कोई तारा कोई सूरज कोई चाँद

ग़ुफ़रान अमजद

कब से बंजर थी नज़र ख़्वाब तो आया

ग़ुफ़रान अमजद

अभी आइना मुज़्महिल है

ग़ुफ़रान अमजद

कोई दो-चार नहीं महव-ए-तमाशा सब हैं

ग़ुफ़रान अमजद

कोई दो चार नहीं महव-ए-तमाशा सब हैं

ग़ुफ़रान अमजद

कब से बंजर थी नज़र ख़्वाब तो आया

ग़ुफ़रान अमजद

इक ख़लिश है मिरे बाहर मिरी दम-साज़ गिरी

ग़ुफ़रान अमजद

दिल की मिट्टी चुपके चुपके रोती है

ग़ुफ़रान अमजद

अजब था ज़ोम कि बज़्म-ए-अज़ा सजाएँगे

ग़ुफ़रान अमजद

ज़बाँ साकित हो क़त-ए-गुफ़्तुगू हो

ग़ुबार भट्टी

तिरा मय-ख़्वार ख़ुश-आग़ाज़-ओ-ख़ुश-अंजाम है साक़ी

ग़ुबार भट्टी

तसल्ली को हमारी बाग़बाँ कुछ और कहता है

ग़ुबार भट्टी

मुझे किस तरह से न हो यक़ीं कि उसे ख़िज़ाँ से गुरेज़ है

ग़ुबार भट्टी

मिरे मुद्दआ-ए-उल्फ़त का पयाम बन के आई

ग़ुबार भट्टी

जल्वा-ए-हुस्न अगर ज़ीनत-ए-काशाना बने

ग़ुबार भट्टी

अजब इंक़लाब का दौर है कि हर एक सम्त फ़िशार है

ग़ुबार भट्टी

ज़मीं की हद अगर कोई नहीं है

गाैस मथरावी

क़ल्ब-ओ-नज़र के सिलसिले मेरी निगाह में रहे

गाैस मथरावी

मुहीत-ए-हुस्न जो अब दम-ब-दम चढ़ाव पे है

ग़ज़नफ़र अली ग़ज़नफ़र

बैठे हैं ईद को सब यार बग़ल में ले कर

ग़ज़नफ़र अली ग़ज़नफ़र

तुम्हारे होते हुए लोग क्यूँ भटकते हैं

ग़ज़नफ़र

मैं उस के झूट को भी सच समझ के सुनता हूँ

ग़ज़नफ़र

पत्थर

ग़ज़नफ़र

गंदुम की बालियाँ

ग़ज़नफ़र

यक़ीन जानिए इस में कोई करामत है

ग़ज़नफ़र

सामान-ए-ऐश सारा हमें यूँ तू दे गया

ग़ज़नफ़र

रफ़्ता रफ़्ता आँखों को हैरानी दे कर जाएगा

ग़ज़नफ़र

ख़ला के दश्त से अब रिश्ता अपना क़त्अ करूँ

ग़ज़नफ़र