Love Poetry (page 338)
गली का आम सा चेहरा भी प्यारा होने लगता है
अहमद अताउल्लाह
गली का आम सा चेहरा भी प्यारा होने लगता है
अहमद अताउल्लाह
ज़रुरत-ए-इत्तिहाद
अहमक़ फफूँदवी
मुस्तक़बिल
अहमक़ फफूँदवी
इल्म की ज़रूरत
अहमक़ फफूँदवी
हमारा देस
अहमक़ फफूँदवी
फ़सान-ए-इबरत
अहमक़ फफूँदवी
दुआ
अहमक़ फफूँदवी
ज़रा सुकून भी सहरा के प्यार ने न दिया
अहमद ज़िया
वो ख़्वाब सा पैकर है गुल-ए-तर की तरह है
अहमद ज़िया
प्यार किया था तुम से मैं ने अब एहसान जताना क्या
अहमद ज़िया
जलती बुझती सी रहगुज़र जैसे
अहमद ज़िया
हर क़दम पर मेरे अरमानों का ख़ूँ
अहमद ज़िया
फ़िक्र के सारे धागे टूटे ज़ेहन भी अब म'अज़ूर हुआ
अहमद ज़िया
मैं मकीं हूँ न मकाँ शहर-ए-मोहब्बत का 'ज़फ़र'
अहमद ज़फ़र
उम्र का आख़िरी दिन
अहमद ज़फ़र
म्यूजियम
अहमद ज़फ़र
हैरत-ख़ाना-ए-इमरोज़
अहमद ज़फ़र
डेड-हाऊस
अहमद ज़फ़र
ज़हर को मय न कहूँ मय को गवारा न कहूँ
अहमद ज़फ़र
यूँ ज़माने में मिरा जिस्म बिखर जाएगा
अहमद ज़फ़र
वो फूल जो मुस्कुरा रहा है
अहमद ज़फ़र
तरस रहा हूँ क़रार-ए-दिल-ओ-नज़र के लिए
अहमद ज़फ़र
तन्हाई ने पर फैलाए रात ने अपनी ज़ुल्फ़ें
अहमद ज़फ़र
सियाह रात की हर दिलकशी को भूल गए
अहमद ज़फ़र
फूल की रंगत मैं ने देखी दर्द की रंगत देखे कौन
अहमद ज़फ़र
मैं यूँ तो नहीं है कि मोहब्बत में नहीं था
अहमद ज़फ़र
किसी परिंदे की वापसी का सफ़र मिरी ख़ाक में मिलेगा
अहमद ज़फ़र
जंगल का सन्नाटा मेरा दुश्मन है
अहमद ज़फ़र
जब तक जुनूँ जुनूँ है ग़म-ए-आगही भी है
अहमद ज़फ़र