Love Poetry (page 340)
बस इक जहान-ए-तहय्युर से आने वाला है
अहमद शनास
यादों की तज्सीम पे मेहनत होती है
अहमद शहरयार
नए ज़मानों की चाप तो सर पे आ खड़ी थी
अहमद शहरयार
कुन-फ़यकूं का हासिल यानी मिट्टी आग हवा और पानी
अहमद शहरयार
ख़ुश नहीं आए बयाबाँ मिरी वीरानी को
अहमद शहरयार
इनइकास-ए-तिश्नगी सहरा भी है दरिया भी है
अहमद शहरयार
दुनिया से हर रिश्ता तोड़ा ख़ुद से रु-गर्दानी की
अहमद शहरयार
दिया नसीब में नहीं सितारा बख़्त में नहीं
अहमद शहरयार
अश्क भेजें मौज उभारें अब्र जारी कीजिए
अहमद शहरयार
आईना बन के अपना तमाशा दिखाएँ हम
अहमद शहरयार
सारा आलम धुआँ धुआँ क्यूँ है
अहमद शाहिद ख़ाँ
साग़र क्यूँ ख़ाली है मिरा ऐ साक़ी तिरे मयख़ाने में
अहमद शाहिद ख़ाँ
ले के फिर ज़ख़्मों की सौग़ात बहारो आओ
अहमद शाहिद ख़ाँ
ग़म के बादल हैं ये ढल जाएँगे रफ़्ता रफ़्ता
अहमद शाहिद ख़ाँ
दिल की ख़्वाहिश बढ़ते बढ़ते तूफ़ाँ होती जाती है
अहमद शाहिद ख़ाँ
वो जिन दरख़्तों की छाँव में से मुसाफ़िरों को उठा दिया था
अहमद सलमान
शबनम है कि धोका है कि झरना है कि तुम हो
अहमद सलमान
जो हम पे गुज़रे थे रंज सारे जो ख़ुद पे गुज़रे तो लोग समझे
अहमद सलमान
फूल ख़ुशबू उन पे उड़ती तितलियों की ख़ैर हो
अहमद सज्जाद बाबर
जिस जगह आगही मुक़य्यद है
अहमद सज्जाद बाबर
जागती शब ख़ुदा-हाफ़िज़
अहमद सज्जाद बाबर
दियों से वा'दे वो कर रही थी अजीब रुत थी
अहमद सज्जाद बाबर
थे यहाँ सारे अमल रद्द-ए-अमल के मुहताज
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
जी-भर के सितारे जगमगाएँ
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
इश्क़ इक मशग़ला-ए-जाँ भी तो हो सकता है
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
इस इश्क़ में न पूछो हाल-ए-दिल-ए-दरीदा
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
चाहे हैं तमाशा मिरे अंदर कई मौसम
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
हैं शाख़ शाख़ परेशाँ तमाम घर मेरे
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
इक ख़्वाब है ये प्यास भी दरिया भी ख़्वाब है
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
इक जिस्म हैं कि सर से जुदा होने वाले हैं
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी