Love Poetry (page 341)

और सी धूप घटा और सी रक्खी हुई है

अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी

आसमाँ-ज़ाद ज़मीनों पे कहीं नाचते हैं

अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी

होता न कोई कार-ए-ज़माना मिरे सुपुर्द

अहमद रिज़वान

शब ढले गुम्बद-ए-असरार में आ जाता है

अहमद रिज़वान

किसी को छोड़ देता हूँ किसी के साथ चलता हूँ

अहमद रिज़वान

आता ही नहीं होने का यक़ीं क्या बात करूँ

अहमद रिज़वान

आँखें बनाता दश्त की वुसअत को देखता

अहमद रिज़वान

ग़म-ए-हबीब ग़म-ए-ज़िंदगी ग़म-ए-दौराँ

अहमद रियाज़

ज़िंदगी ग़म की आँच सह कोई

अहमद रियाज़

हम ही बदलेंगे रह-ओ-रस्म-ए-गुलिस्ताँ यारो

अहमद रियाज़

ब-वस्फ़-ए-शौक़ भी दिल का कहा नहीं करते

अहमद रियाज़

ब वस्फ़-ए-शौक़ भी दिल का कहा नहीं करते

अहमद रियाज़

ख़ून की हर बूँद पत्थर हो चुकी

अहमद रज़ी बछरायूनी

ज़िंदगी के वो किसी मोड़ पे गाहे गाहे

अहमद राही

वक़्त की क़ब्र में उल्फ़त का भरम रखने को

अहमद राही

क़द ओ गेसू लब-ओ-रुख़्सार के अफ़्साने चले

अहमद राही

कहीं ये अपनी मोहब्बत की इंतिहा तो नहीं

अहमद राही

वक़्त की बात

अहमद राही

सरगोशी

अहमद राही

सराब

अहमद राही

ग़म-गुसारी

अहमद राही

दर्द-ए-मुश्तरक

अहमद राही

ये दास्तान-ए-ग़म-ए-दिल कहाँ कही जाए

अहमद राही

वो बे-नियाज़ मुझे उलझनों में डाल गया

अहमद राही

तवील रातों की ख़ामुशी में मिरी फ़ुग़ाँ थक के सो गई है

अहमद राही

तवील रातों की ख़ामुशी में मिरी फ़ुग़ाँ थक के सो गई है

अहमद राही

तन्हाइयों के दश्त में अक्सर मिला मुझे

अहमद राही

क़द ओ गेसू लब-ओ-रुख़्सार के अफ़्साने चले

अहमद राही

मैं दिल-ज़दा हूँ अगर दिल-फ़िगार वो भी हैं

अहमद राही

लम्हा लम्हा शुमार कौन करे

अहमद राही