Love Poetry (page 343)

इंफ़िसाल

अहमद नदीम क़ासमी

गीत

अहमद नदीम क़ासमी

एक नज़्म

अहमद नदीम क़ासमी

एक दरख़्वास्त

अहमद नदीम क़ासमी

ढलान

अहमद नदीम क़ासमी

दश्त-ए-वफ़ा

अहमद नदीम क़ासमी

दरांती

अहमद नदीम क़ासमी

बीसवीं सदी का इंसान

अहमद नदीम क़ासमी

अज़ली मसर्रतों की अज़ली मंज़िल

अहमद नदीम क़ासमी

अक़ीदे

अहमद नदीम क़ासमी

यूँ बे-कार न बैठो दिन भर यूँ पैहम आँसू न बहाओ

अहमद नदीम क़ासमी

वो कोई और न था चंद ख़ुश्क पत्ते थे

अहमद नदीम क़ासमी

उम्र भर उस ने इसी तरह लुभाया है मुझे

अहमद नदीम क़ासमी

तुझे खो कर भी तुझे पाऊँ जहाँ तक देखूँ

अहमद नदीम क़ासमी

तू जो बदला तो ज़माना भी बदल जाएगा

अहमद नदीम क़ासमी

तेरी महफ़िल भी मुदावा नहीं तन्हाई का

अहमद नदीम क़ासमी

तंग आ जाते हैं दरिया जो कुहिस्तानों में

अहमद नदीम क़ासमी

सूरज को निकलना है सो निकलेगा दोबारा

अहमद नदीम क़ासमी

शुऊर में कभी एहसास में बसाऊँ उसे

अहमद नदीम क़ासमी

शाम को सुब्ह-ए-चमन याद आई

अहमद नदीम क़ासमी

साँस लेना भी सज़ा लगता है

अहमद नदीम क़ासमी

फूलों से लहू कैसे टपकता हुआ देखूँ

अहमद नदीम क़ासमी

मुदावा हब्स का होने लगा आहिस्ता आहिस्ता

अहमद नदीम क़ासमी

मरूँ तो मैं किसी चेहरे में रंग भर जाऊँ

अहमद नदीम क़ासमी

मैं वो शाएर हूँ जो शाहों का सना-ख़्वाँ न हुआ

अहमद नदीम क़ासमी

मैं किसी शख़्स से बेज़ार नहीं हो सकता

अहमद नदीम क़ासमी

मैं हूँ या तू है ख़ुद अपने से गुरेज़ाँ जैसे

अहमद नदीम क़ासमी

लबों पे नर्म तबस्सुम रचा के धुल जाएँ

अहमद नदीम क़ासमी

खड़ा था कब से ज़मीं पीठ पर उठाए हुए

अहमद नदीम क़ासमी

कौन कहता है कि मौत आई तो मर जाऊँगा

अहमद नदीम क़ासमी