Love Poetry (page 342)

कोई बतलाए कि क्या हैं यारो

अहमद राही

कभी तिरी कभी अपनी हयात का ग़म है

अहमद राही

कभी हयात का ग़म है कभी तिरा ग़म है

अहमद राही

जिस राह से भी गुज़र गए हम

अहमद राही

ग़म-ए-हयात में कोई कमी नहीं आई

अहमद राही

गर्दिश-ए-जाम नहीं गर्दिश-ए-अय्याम तो है

अहमद राही

दिन को रहते झील पर दरिया किनारे रात को

अहमद राही

दिन गुज़रता है कहाँ रात कहाँ होती है

अहमद राही

दिल पे जब दर्द की उफ़्ताद पड़ी होती है

अहमद राही

दिल के सुनसान जज़ीरों की ख़बर लाएगा

अहमद राही

आम है कूचा-ओ-बाज़ार में सरकार की बात

अहमद राही

ज़िंदगी शम्अ की मानिंद जलाता हूँ 'नदीम'

अहमद नदीम क़ासमी

सिर्फ़ इस शौक़ से पूछी हैं हज़ारों बातें

अहमद नदीम क़ासमी

मुझ को दुश्मन के इरादों पे भी प्यार आता है

अहमद नदीम क़ासमी

लोग कहते हैं कि साया तिरे पैकर का नहीं

अहमद नदीम क़ासमी

कुछ खेल नहीं है इश्क़ करना

अहमद नदीम क़ासमी

भरी दुनिया में फ़क़त मुझ से निगाहें न चुरा

अहमद नदीम क़ासमी

अजब तज़ाद में काटा है ज़िंदगी का सफ़र

अहमद नदीम क़ासमी

वक़्त

अहमद नदीम क़ासमी

तर्क-ए-दरयूज़ा

अहमद नदीम क़ासमी

तदफ़ीन

अहमद नदीम क़ासमी

रूह लबों तक आ कर सोचे

अहमद नदीम क़ासमी

रेस्तोराँ

अहमद नदीम क़ासमी

क़रिया-ए-मोहब्बत

अहमद नदीम क़ासमी

क़ानून-ए-क़ुदरत

अहमद नदीम क़ासमी

पस-ए-आईना

अहमद नदीम क़ासमी

नया साल

अहमद नदीम क़ासमी

महफ़िल-ए-शब

अहमद नदीम क़ासमी

लरज़ते साए

अहमद नदीम क़ासमी

जंगल की आग

अहमद नदीम क़ासमी