Love Poetry (page 345)

इश्क़ में कौन बता सकता है

अहमद मुश्ताक़

इस माअ'रके में इश्क़ बेचारा करेगा क्या

अहमद मुश्ताक़

गुज़रे हज़ार बादल पलकों के साए साए

अहमद मुश्ताक़

इक रात चाँदनी मिरे बिस्तर पे आई थी

अहमद मुश्ताक़

दिल फ़सुर्दा तो हुआ देख के उस को लेकिन

अहमद मुश्ताक़

चाँद भी निकला सितारे भी बराबर निकले

अहमद मुश्ताक़

अहल-ए-हवस तो ख़ैर हवस में हुए ज़लील

अहमद मुश्ताक़

ज़ुल्फ़ देखी वो धुआँ-धार वो चेहरा देखा

अहमद मुश्ताक़

ज़िंदगी से एक दिन मौसम ख़फ़ा हो जाएँगे

अहमद मुश्ताक़

ज़मीं से उगती है या आसमाँ से आती है

अहमद मुश्ताक़

वही उन की सतीज़ा-कारी है

अहमद मुश्ताक़

उजला तिरा बर्तन है और साफ़ तिरा पानी

अहमद मुश्ताक़

उदास कर के दरीचे नए मकानों के

अहमद मुश्ताक़

टूट गया हवा का ज़ोर सैल-ए-बला उतर गया

अहमद मुश्ताक़

तुम आए हो तुम्हें भी आज़मा कर देख लेता हूँ

अहमद मुश्ताक़

तिरे दीवाने हर रंग रहे तिरे ध्यान की जोत जगाए हुए

अहमद मुश्ताक़

शाम-ए-ग़म याद है कब शम्अ' जली याद नहीं

अहमद मुश्ताक़

शबनम को रेत फूल को काँटा बना दिया

अहमद मुश्ताक़

सफ़र नया था न कोई नया मुसाफ़िर था

अहमद मुश्ताक़

रुख़्सत-ए-शब का समाँ पहले कभी देखा न था

अहमद मुश्ताक़

रात फिर रंग पे थी उस के बदन की ख़ुशबू

अहमद मुश्ताक़

पानी में अक्स और किसी आसमाँ का है

अहमद मुश्ताक़

नाला-ए-ख़ूनीं से रौशन दर्द की रातें करो

अहमद मुश्ताक़

मुसलसल याद आती है चमक चश्म-ए-ग़ज़ालाँ की

अहमद मुश्ताक़

मोनिस-ए-दिल कोई नग़्मा कोई तहरीर नहीं

अहमद मुश्ताक़

मिल ही जाएगा कभी दिल को यक़ीं रहता है

अहमद मुश्ताक़

मिल ही आते हैं उसे ऐसा भी क्या हो जाएगा

अहमद मुश्ताक़

मंज़र-ए-सुबह दिखाने उसे लाया न गया

अहमद मुश्ताक़

मलाल-ए-दिल से इलाज-ए-ग़म-ए-ज़माना किया

अहमद मुश्ताक़

लुभाता है अगरचे हुस्न-ए-दरिया डर रहा हूँ मैं

अहमद मुश्ताक़