Love Poetry (page 339)
फ़लक पे चाँद नहीं कोई अब्र-पारा नहीं
अहमद ज़फ़र
इक तसव्वुर तो है तस्वीर नहीं
अहमद ज़फ़र
दिन हुआ कट कर गिरा मैं रौशनी की धार से
अहमद ज़फ़र
और क्या मेरे लिए अरसा-ए-महशर होगा
अहमद ज़फ़र
आसमाँ की आँख सूरज चाँद बीनाई भी है
अहमद ज़फ़र
आप कहें तो गुलशन है
अहमद ज़फ़र
वो करे बात तो हर लफ़्ज़ से ख़ुश्बू आए
अहमद वसी
प्यारे प्यारे युगों में आए प्यारे प्यारे लोग
अहमद वसी
कितनी ख़ुश-हाल है सारी दुनिया
अहमद वहीद अख़्तर
हर गली कूचे में लश्कर देखो
अहमद वहीद अख़्तर
अपनी ही आवाज़ के क़द के बराबर हो गया
अहमद तनवीर
फूल बाहर है कि अंदर है मिरे सीने में
अहमद शनास
लफ़्ज़ जब उतरा मिरी आँखें मुनव्वर हो गईं
अहमद शनास
चाँद में दरवेश है जुगनू में जोगी
अहमद शनास
बहुत छोटा सफ़र था ज़िंदगी का
अहमद शनास
बग़ैर-ए-जिस्म भी है जिस्म का एहसास ज़िंदा
अहमद शनास
ज़माना हो गया है ख़्वाब देखे
अहमद शनास
ज़माना हो गया है ख़्वाब देखे
अहमद शनास
ये वक़्त रौशनी का मुख़्तसर है
अहमद शनास
यहाँ हर लफ़्ज़ मअनी से जुदा है
अहमद शनास
तसव्वुर को जगा रक्खा है उस ने
अहमद शनास
सुब्ह-ए-वजूद हूँ कि शब-ए-इंतिज़ार हूँ
अहमद शनास
मोहब्बतों को कहीं और पाल कर देखो
अहमद शनास
मेरी रातों का सफ़र तूर नहीं हो सकता
अहमद शनास
मिरी आँखों में आ दिल में उतर पैवंद-ए-जाँ हो जा
अहमद शनास
मैं फ़तह-ए-ज़ात मंज़र तक न पहुँचा
अहमद शनास
लम्हा लम्हा रोज़ ओ शब को देर होती जाएगी
अहमद शनास
जिस्म के बयाबाँ में दर्द की दुआ माँगें
अहमद शनास
इमरोज़ की कश्ती को डुबोने के लिए हूँ
अहमद शनास
है वाहिमों का तमाशा यहाँ वहाँ देखो
अहमद शनास