Love Poetry (page 337)

नाकाम हैं असर से दुआएँ दुआ से हम

अहसन मारहरवी

मुतमइन अपने यक़ीं पर अगर इंसाँ हो जाए

अहसन मारहरवी

मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है

अहसन मारहरवी

क्या ज़रूरत बे-ज़रूरत देखना

अहसन मारहरवी

कशिश-ए-हुस्न की ये अंजुमन-आराई है

अहसन मारहरवी

इश्क़ करते हैं तो अहल-ए-इश्क़ यूँ सौदा करें

अहसन मारहरवी

इक नज़र में दर्द खो देना दिल-ए-बीमार का

अहसन मारहरवी

दिल झुका माइल तबीअत हो गई

अहसन मारहरवी

चाहिए इश्क़ में इस तरह फ़ना हो जाना

अहसन मारहरवी

बाहम जो हुस्न ओ इश्क़ में याराना हो गया

अहसन मारहरवी

ऐ दिल न सुन अफ़्साना किसी शोख़ हसीं का

अहसन मारहरवी

अदा में बाँकपन अंदाज़ में इक आन पैदा कर

अहसन मारहरवी

अदा में बाँकपन अंदाज़ में इक आन पैदा कर

अहसन मारहरवी

जो जो शुऊर-ए-ज़ेहन पे आता चला गया

अहसन लखनवी

इलाज-ए-हसरत-ए-दिल-गीर कर रहा हूँ मैं

अहसन लखनवी

तुझे अपना बनाना चाहता हूँ

अहसन इमाम अहसन

मुझ को ख़ुशियाँ न सही ग़म की कहानी दे दे

अहसन इमाम अहसन

बेचैन दिल है फिर भी चेहरे पे दिलकशी है

अहसन इमाम अहसन

अस्र-ए-हाज़िर का जो इंसान नज़र आता है

अहसन इमाम अहसन

अजीब कर्ब सा है ज़िंदगी के चेहरे पर

अहसन इमाम अहसन

अजीब कर्ब सा है ज़िंदगी के चेहरे पर

अहसन इमाम अहसन

अंग अंग झलक उठता है अंगों के दर्पन के बीच

अहसन अहमद अश्क

रेत पर सफ़र का लम्हा

अहमद शमीम

वो तो मुझ में ही निहाँ था मुझे मालूम न था

अहमद निसार

तिरे पास रह कर सँवर जाऊँगा मैं

अहमद निसार

रिश्ता-ए-दिल उसी से मिलता है

अहमद निसार

मक़ाम-ए-हिज्र कहीं इम्तिहाँ से ख़ाली है

अहमद निसार

इश्क़ में बर्बाद होने के सिवा रक्खा न था

अहमद निसार

ग़म का पहाड़ मोम के जैसे पिघल गया

अहमद निसार

दिल को ब-नाम-ए-इश्क़ सजाना पड़ा हमें

अहमद निसार