Love Poetry (page 82)
शे'र होता है अब महीनों में
हबीब जालिब
नज़र नज़र में लिए तेरा प्यार फिरते हैं
हबीब जालिब
न डगमगाए कभी हम वफ़ा के रस्ते में
हबीब जालिब
'मीर'-ओ-'ग़ालिब' बने 'यगाना' बने
हबीब जालिब
मावरा-ए-जहाँ से आए हैं
हबीब जालिब
महताब-सिफ़त लोग यहाँ ख़ाक-बसर हैं
हबीब जालिब
लोग गीतों का नगर याद आया
हबीब जालिब
कितना सुकूत है रसन-ओ-दार की तरफ़
हबीब जालिब
कौन बताए कौन सुझाए कौन से देस सिधार गए
हबीब जालिब
कम पुराना बहुत नया था फ़िराक़
हबीब जालिब
कैसे कहें कि याद-ए-यार रात जा चुकी बहुत
हबीब जालिब
कहीं आह बन के लब पर तिरा नाम आ न जाए
हबीब जालिब
कभी तो मेहरबाँ हो कर बुला लें
हबीब जालिब
झूटी ख़बरें घड़ने वाले झूटे शे'र सुनाने वाले
हबीब जालिब
जागने वालो ता-ब-सहर ख़ामोश रहो
हबीब जालिब
जब कोई कली सेहन-ए-गुलिस्ताँ में खिली है
हबीब जालिब
इस शहर-ए-ख़राबी में ग़म-ए-इश्क़ के मारे
हबीब जालिब
इस शहर-ए-ख़राबी में ग़म-ए-इश्क़ के मारे
हबीब जालिब
हम ने सुना था सहन-ए-चमन में कैफ़ के बादल छाए हैं
हबीब जालिब
हम आवारा गाँव गाँव बस्ती बस्ती फिरने वाले
हबीब जालिब
हर-गाम पर थे शम्स-ओ-क़मर उस दयार में
हबीब जालिब
गुलशन की फ़ज़ा धुआँ धुआँ है
हबीब जालिब
ग़ज़लें तो कही हैं कुछ हम ने उन से न कहा अहवाल तो क्या
हबीब जालिब
ग़ज़लें तो कही हैं कुछ हम ने उन से न कहा अहवाल तो क्या
हबीब जालिब
घर के ज़िंदाँ से उसे फ़ुर्सत मिले तो आए भी
हबीब जालिब
'ग़ालिब'-ओ-'यगाना' से लोग भी थे जब तन्हा
हबीब जालिब
इक शख़्स बा-ज़मीर मिरा यार 'मुसहफ़ी'
हबीब जालिब
दुश्मनों ने जो दुश्मनी की है
हबीब जालिब
दिल-ए-पुर-शौक़ को पहलू में दबाए रक्खा
हबीब जालिब
दिल वालो क्यूँ दिल सी दौलत यूँ बे-कार लुटाते हो
हबीब जालिब