Love Poetry (page 81)
तेज़ चलो
हबीब जालिब
तेरे होने से
हबीब जालिब
शहर-ए-ज़ुल्मात को सबात नहीं
हबीब जालिब
सहाफ़ी से
हबीब जालिब
'नूर-जहाँ'
हबीब जालिब
नन्ही जा सो जा
हबीब जालिब
नाम क्या लूँ
हबीब जालिब
मुशीर
हबीब जालिब
मुम्ताज़
हबीब जालिब
मीरा-जी
हबीब जालिब
मेरी बच्ची
हबीब जालिब
मता-ए-ग़ैर
हबीब जालिब
लायल-पूर
हबीब जालिब
'लता'
हबीब जालिब
ख़ुदा हमारा है
हबीब जालिब
जम्हूरियत
हबीब जालिब
दास्तान-ए-दिल-ए-दो-नीम
हबीब जालिब
कॉफ़ी-हाउस
हबीब जालिब
बगिया लहूलुहान
हबीब जालिब
अहद-ए-सज़ा
हबीब जालिब
ज़र्रे ही सही कोह से टकरा तो गए हम
हबीब जालिब
यूँ वो ज़ुल्मत से रहा दस्त-ओ-गरेबाँ यारो
हबीब जालिब
ये उजड़े बाग़ वीराने पुराने
हबीब जालिब
उस ने जब हँस के नमस्कार किया
हबीब जालिब
उस गली के लोगों को मुँह लगा के पछताए
हबीब जालिब
तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था
हबीब जालिब
तू रंग है ग़ुबार हैं तेरी गली के लोग
हबीब जालिब
तेरी आँखों का अजब तुर्फ़ा समाँ देखा है
हबीब जालिब
तिरे माथे पे जब तक बल रहा है
हबीब जालिब
शेर से शाइरी से डरते हैं
हबीब जालिब