दर Poetry (page 60)

शिकस्त-ए-आसमाँ हो जाऊँगा मैं

फ़रहान सालिम

ग़ुबार दिल पे बहुत आ गया है धो लें आज

फ़रीद जावेद

यक़ीन

फ़रीद इशरती

तक़ाज़ा

फ़रीद इशरती

छिपकिली

फ़रीद इशरती

निकल के घर से और मैदाँ में आ के

फ़राज़ सुल्तानपूरी

शिकायत हम नहीं करते रिआ'यत वो नहीं करते

फ़रह इक़बाल

मोहब्बत का दिया ऐसे बुझा था

फ़रह इक़बाल

हमें तो साथ चलने का हुनर अब तक नहीं आया

फ़रह इक़बाल

ख़ूब निभेगी हम दोनों में मेरे जैसा तू भी है

फ़राग़ रोहवी

कभी न सोचा था मैं ने उड़ान भरते हुए

फ़राग़ रोहवी

दिन में भी हसरत-ए-महताब लिए फिरते हैं

फ़राग़ रोहवी

ज़िंदगी जब्र है और जब्र के आसार नहीं

फ़ानी बदायुनी

ज़बाँ मुद्दआ-आश्ना चाहता हूँ

फ़ानी बदायुनी

वा-ए-नादानी ये हसरत थी कि होता दर खुला

फ़ानी बदायुनी

संग-ए-दर देख के सर याद आया

फ़ानी बदायुनी

क़िस्सा-ए-ज़ीस्त मुख़्तसर करते

फ़ानी बदायुनी

क़तरा दरिया-ए-आश्नाई है

फ़ानी बदायुनी

नाम बदनाम है नाहक़ शब-ए-तन्हाई का

फ़ानी बदायुनी

क्यूँ न नैरंग-ए-जुनूँ पर कोई क़ुर्बां हो जाए

फ़ानी बदायुनी

कुछ कम तो हुआ रंज-ए-फ़रावान-ए-तमन्ना

फ़ानी बदायुनी

की वफ़ा यार से एक एक जफ़ा के बदले

फ़ानी बदायुनी

जीने की है उम्मीद न मरने का यक़ीं है

फ़ानी बदायुनी

जी ढूँढता है घर कोई दोनों जहाँ से दूर

फ़ानी बदायुनी

जज़्ब-ए-दिल जब ब-रू-ए-कार आया

फ़ानी बदायुनी

हर साँस के साथ जा रहा हूँ

फ़ानी बदायुनी

दिल की काया ग़म ने वो पल्टी कि तुझ सा बन गया

फ़ानी बदायुनी

दिल की हर लर्ज़िश-ए-मुज़्तर पे नज़र रखते हैं

फ़ानी बदायुनी

तर्क-ए-वतन के बाद ही क़द्र-ए-वतन हुई

फ़ना निज़ामी कानपुरी

वो ख़ानुमाँ-ख़राब न क्यूँ दर-ब-दर फिरे

फ़ना निज़ामी कानपुरी

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