प्रेम Poetry (page 16)

ऐसी अच्छी सूरत निकली पानी की

स्वप्निल तिवारी

रंज इस का नहीं कि हम टूटे

सूर्यभानु गुप्त

सती

सुरूर जहानाबादी

बुलबुल ओ परवाना

सुरूर जहानाबादी

ब-ख़ुदा इश्क़ का आज़ार बुरा होता है

सुरूर जहानाबादी

जिन से मिल कर ज़िंदगी से इश्क़ हो जाए वो लोग

सुरूर बाराबंकवी

कभी अपने इश्क़ पे तब्सिरे कभी तज़्किरे रुख़-ए-यार के

सुरूर बाराबंकवी

मैं दिन को रात के दरिया में जब उतार आया

सूरज नारायण

हमारे हाल की जा कर उन्हें ख़बर तो करें

सूरज नारायण

तिलिस्म-ए-कार-ए-जहाँ का असर तमाम हुआ

सुल्तान अख़्तर

रक़्स करता है ब-अंदाज़-ए-जुनूँ दौड़ता है

सुल्तान अख़्तर

न ढलती शाम न ठंडी सहर में रक्खा है

सुलेमान ख़ुमार

क्यूँ मेरे दुख चुनते हो

सुलेमान ख़ुमार

तुझे क्या हुआ है बता ऐ दिल न सुकून है न क़रार है

सुलैमान अहमद मानी

इक तिरा दर्द है तन्हाई है रुस्वाई है

सुलैमान अहमद मानी

न इब्तिदा-ए-जुनूँ है न इंतिहा-ए-जुनूँ

सुहैल काकोरवी

शौक़-ए-बुतान-ए-अंजुमन-आरा लिए हुए

सुहा मुजद्ददी

इसी आशिक़ी में पैहम हुई ख़ानुमाँ-ख़राबी

सुहा मुजद्ददी

ज़ब्त की क़ैद-ए-सख़्त ने हम को रिहा नहीं किया

सूफ़िया अनजुम ताज

वो थे पहलू में और थी चाँदनी रात

सूफ़ी तबस्सुम

तिरी महफ़िल में सोज़-ए-जावेदानी ले के आया हूँ

सूफ़ी तबस्सुम

शजर शजर निगराँ है कली कली बेदार

सूफ़ी तबस्सुम

किस ने ग़म के जाल बिखेरे

सूफ़ी तबस्सुम

इस आलम-ए-वीराँ में क्या अंजुमन-आराई

सूफ़ी तबस्सुम

इलाज-ए-दर्द-ए-दिल-ए-सोगवार हो न सका

सूफ़ी तबस्सुम

ग़म-नसीबों को किसी ने तो पुकारा होगा

सूफ़ी तबस्सुम

याद आती है तिरी यूँ मिरे ग़म-ख़ाने में

सुदर्शन कुमार वुग्गल

इश्क़ है इश्क़ ये मज़ाक़ नहीं

सुदर्शन फ़ाकिर

शायद मैं ज़िंदगी की सहर ले के आ गया

सुदर्शन फ़ाकिर

मेरे दुख की कोई दवा न करो

सुदर्शन फ़ाकिर

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