शहर Poetry (page 53)

हिरासत

गुलज़ार

डाइरी

गुलज़ार

बीते रिश्ते तलाश करती है

गुलज़ार

क्या बात है क्यूँ शहर में अब जी नहीं लगता

गुलनार आफ़रीन

बग़ैर सम्त के चलना भी काम आ ही गया

गुलनार आफ़रीन

न पूछ ऐ मिरे ग़म-ख़्वार क्या तमन्ना थी

गुलनार आफ़रीन

हमारा नाम पुकारे हमारे घर आए

गुलनार आफ़रीन

आँसू भी वही कर्ब के साए भी वही हैं

गुलनार आफ़रीन

शहर-ए-जाँ की फ़सीलों से बाहर

गुलाम जीलानी असग़र

तू अंग अंग में ख़ुश्बू सी बन गया होगा

गुलाम जीलानी असग़र

कितने दरिया इस नगर से बह गए

गुलाम जीलानी असग़र

मैं ग़र्क़ वहाँ प्यास के पैकर की तरह था

गुहर खैराबादी

अब के सावन में शरारत ये मिरे साथ हुई

गोपालदास नीरज

नज़्म

गोपाल मित्तल

स्वाँग अब तर्क-ए-मोहब्बत का रचाया जाए

गोपाल मित्तल

शे'र कहने का मज़ा है अब तो

गोपाल मित्तल

मसरफ़ के बग़ैर जल रहा हूँ

गोपाल मित्तल

दिल जलाने से कहाँ दूर अंधेरा होगा

गोपाल मित्तल

हिसार-ए-जिस्म मिरा तोड़-फोड़ डालेगा

ग़ुलाम मुर्तज़ा राही

वफ़ा के शहर में अब लोग झूट बोलते हैं

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

तिरी आवाज़ को इस शहर की लहरें तरसती हैं

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

गलियों की उदासी पूछती है घर का सन्नाटा कहता है

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

बयाबाँ दूर तक मैं ने सजाया था

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

यूँ तो सदा-ए-ज़ख़्म बड़ी दूर तक गई

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

ये जहाँ-नवर्द की दास्ताँ ये फ़साना डोलते साए का

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

वो बे-दिली में कभी हाथ छोड़ देते हैं

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

सोए हुए जज़्बों को जगाना ही नहीं था

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

सीना मदफ़न बन जाता है जीते जागते राज़ों का

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

ख़्वाब कहाँ से टूटा है ताबीर से पूछते हैं

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

ख़ामोश थे तुम और बोलता था बस एक सितारा आँखों में

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.