शोर Poetry (page 4)

नयन में ख़ूँ भर आया दिल में ख़ार-ए-ग़म छुपा शायद

वली उज़लत

ख़ुनुक-जोशी न करते जूँ सबा गर ये बुताँ हम से

वली उज़लत

जूँ गुल अज़-बस-कि जुनूँ है मिरा सामान के सात

वली उज़लत

बहार आई जुनूँ लेगा हमारा इम्तिहाँ देखें

वली उज़लत

ऐ नासेह चश्म-ए-तर से मत कर आँसू पाक रहने दे

वली उज़लत

न हो क्यूँ शोर दिल की बाँसुली में

वली मोहम्मद वली

जहालत का मंज़र जो राहों में था

वकील अख़्तर

इस ज़माने में ख़मोशी से निकलता नहीं काम

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

जो तुझ से शोर-ए-तबस्सुम ज़रा कमी होगी

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

आँख में जल्वा तिरा दिल में तिरी याद रहे

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

खंडर आसेब और फूल

वहीद अख़्तर

कहीं शुनवाई नहीं हुस्न की महफ़िल के ख़िलाफ़

वहीद अख़्तर

लम्हा लम्हा शोर सा बरपा हुआ अच्छा लगा

विशाल खुल्लर

क्या ख़ला आसमान था पहले

विशाल खुल्लर

बहुत दिनों में हम उन से जो हम-कलाम हुए

वारिस किरमानी

जब भी पेड़ों पे समर जागता है

उमर फ़रहत

उठा ये शोर वहीं से सदाओं का क्यूँ-कर

उमर अंसारी

बाहर बाहर सन्नाटा है अंदर अंदर शोर बहुत

उमर अंसारी

हर इक का दर्द उसी आशुफ़्ता-सर में तन्हा था

उमर अंसारी

बाहर बाहर सन्नाटा है अंदर अंदर शोर बहुत

उमर अंसारी

तुम अच्छे थे तुम को रुस्वा हम ने किया

तौसीफ़ तबस्सुम

मरते मरते रौशनी का ख़्वाब तो पूरा हुआ

तौसीफ़ तबस्सुम

याद और ग़म की रिवायात से निकला हुआ है

तौक़ीर तक़ी

ज़मीं पर सर-निगूँ बैठा हुआ हूँ

तस्लीम इलाही ज़ुल्फ़ी

बे-मेहर कहते हो उसे जो बेवफ़ा नहीं

मीर तस्कीन देहलवी

थम थम के बारिशें अब जल्वा दिखा रही हैं

तासीर सिद्दीक़ी

बड़ी हवेली के तक़्सीम जब उजाले हुए

तारिक़ क़मर

'तनवीर' अब तू हल्क़ से भोंपू का काम ले

तनवीर सिप्रा

फिर क़िस्सा-ए-शब लिख देने के ये दिल हालात बनाए है

तालीफ़ हैदर

दुनिया-भर में जितने मंज़र अच्छे हैं

ताजदार आदिल

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