याद Poetry (page 65)

मुझ पास कभी वो क़द-ए-शमशाद न आया

फ़ाएज़ देहलवी

जान-ए-अय्याम-ए-दिलबरी है याद

फ़ाएज़ देहलवी

धूप सा यू कपूल नारी है

फ़ाएज़ देहलवी

दामन तेरा मुझ से छूटा मिलने के हालात नहीं

एलिज़ाबेथ कुरियन मोना

था वो जंगल कि नगर याद नहीं

एजाज़ उबैद

नए सफ़र में जो पिछले सफ़र के साथी थे

एजाज़ उबैद

ऐसे ही दिन थे कुछ ऐसी शाम थी

एजाज़ उबैद

होता है फिर वो और किसी याद के सुपुर्द

एजाज़ गुल

अजीब शख़्स था मैं भी भुला नहीं पाया

एजाज़ गुल

ख़ाशाक से ख़िज़ाँ में रहा नाम बाग़ का

एजाज़ गुल

इतना तिलिस्म याद के चक़माक़ में रहा

एजाज़ गुल

गली से अपनी उठाता है वो बहाने से

एजाज़ गुल

दर खोल के देखूँ ज़रा इदराक से बाहर

एजाज़ गुल

रह-ए-हयात में लाखों थे हम-सफ़र 'एजाज़'

एजाज़ अहमद एजाज़

मुहाजिर

एजाज़ अहमद एजाज़

फ़ासलों की बात

एजाज़ अहमद एजाज़

सदाक़तों के पयम्बर गए रसूल गए

एजाज़ अहमद एजाज़

यूँ गुज़रता है तिरी याद की वादी में ख़याल

एहतिशाम हुसैन

उन आँखों को नज़र क्या आ गया है

एहतिशाम हुसैन

कुछ मिरे शौक़ ने दर-पर्दा कहा हो जैसे

एहतिशाम हुसैन

गया था बज़्म-ए-मोहब्बत में ख़ाली जाम लिए

एहतिशाम हुसैन

मिरी हयात को बे-रब्त बाब रहने दे

एहतिशाम अख्तर

जज़्बात की शिद्दत से निखरता है बयाँ और

एहसान जाफ़री

आज उस ने हँस के यूँ पूछा मिज़ाज

एहसान दानिश

यूँ न मिल मुझ से ख़फ़ा हो जैसे

एहसान दानिश

जब भी ख़ल्वत में वो याद आएगा

एहसान दानिश

इश्क़ को तक़लीद से आज़ाद कर

एहसान दानिश

जो अना की सिफ़त है ज़ाती है

डॉक्टर आज़म

मुझ में आबाद सराबों का इलाक़ा करने

दिनेश नायडू

लंदन में जश्न-ए-ग़ालिब

दिलावर फ़िगार

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