याद Poetry (page 66)

इलिएट्स-गर्ल्स-कॉलेज और कुल पाक ओ हिन्द मुशाएरा

दिलावर फ़िगार

मैं ने कहा कि शहर के हक़ में दुआ करो

दिलावर फ़िगार

क्या चाहा था क्या सोचा था क्या गुज़री क्या बात हुई

देवमणि पांडेय

अपनों के सितम याद न ग़ैरों की जफ़ा याद

द्वारका दास शोला

पूरा चाँद

दर्शिका वसानी

काश

दर्शिका वसानी

राज़-ए-निहाँ थी ज़िंदगी राज़-ए-निहाँ है आज भी

दर्शन सिंह

गुलों पे ख़ाक-ए-मेहन के सिवा कुछ और नहीं

दर्शन सिंह

दौलत मिली जहान की नाम-ओ-निशाँ मिले

दर्शन सिंह

चश्म-ए-बीना हो तो क़ैद-ए-हरम-ओ-तूर नहीं

दर्शन सिंह

मैं जाता हूँ दिल को तिरे पास छोड़े

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

ग़ाफ़िल ख़ुदा की याद पे मत भूल ज़ीनहार

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मदरसा या दैर था या काबा या बुत-ख़ाना था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मदरसा या दैर था या काबा या बुत-ख़ाना था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

चमन में सुब्ह ये कहती थी हो कर चश्म-ए-तर शबनम

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

अर्ज़-ओ-समा कहाँ तिरी वुसअ'त को पा सके

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

अगर यूँ ही ये दिल सताता रहेगा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

अगर यूँ ही ये दिल सताता रहेगा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

किस क़दर इज़्तिराब है यारो

दानिश फ़राही

वो ज़माना भी तुम्हें याद है तुम कहते थे

दाग़ देहलवी

वो दिन गए कि 'दाग़' थी हर दम बुतों की याद

दाग़ देहलवी

वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे

दाग़ देहलवी

मुझे याद करने से ये मुद्दआ था

दाग़ देहलवी

मुअज़्ज़िन ने शब-ए-वस्ल अज़ाँ पिछले पहर

दाग़ देहलवी

मेरे क़ाबू में न पहरों दिल-ए-नाशाद आया

दाग़ देहलवी

लीजिए सुनिए अब अफ़्साना-ए-फ़ुर्क़त मुझ से

दाग़ देहलवी

दी शब-ए-वस्ल मोअज़्ज़िन ने अज़ाँ पिछली रात

दाग़ देहलवी

आती है बात बात मुझे बार बार याद

दाग़ देहलवी

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था

दाग़ देहलवी

फिरे राह से वो यहाँ आते आते

दाग़ देहलवी

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