याद Poetry (page 67)

निगाह-ए-शोख़ जब उस से लड़ी है

दाग़ देहलवी

मुझे ऐ अहल-ए-काबा याद क्या मय-ख़ाना आता है

दाग़ देहलवी

कौन सा ताइर-ए-गुम-गश्ता उसे याद आया

दाग़ देहलवी

इन आँखों ने क्या क्या तमाशा न देखा

दाग़ देहलवी

ग़म से कहीं नजात मिले चैन पाएँ हम

दाग़ देहलवी

दिल गया तुम ने लिया हम क्या करें

दाग़ देहलवी

बाक़ी जहाँ में क़ैस न फ़रहाद रह गया

दाग़ देहलवी

दुनिया में दिल लगा के बहुत सोचते रहे

डी. राज कँवल

काएनात-ए-आरज़ू में हम बसर करने लगे

चित्रांश खरे

नज़्म

चाैधरी मोहम्मद नईम

जब सर-ए-बाम वो ख़ुर्शीद-जमाल आता है

चरख़ चिन्योटी

फ़ज़ा-ए-ना-उमीदी में उमीद-अफ़ज़ा पयाम आया

चरख़ चिन्योटी

कैसा वो मौसम था ये तो समझ न पाए हम

चंद्र प्रकाश शाद

इस को ना-क़दरी-ए-आलम का सिला कहते हैं

चकबस्त ब्रिज नारायण

एक साग़र भी इनायत न हुआ याद रहे

चकबस्त ब्रिज नारायण

नए झगड़े निराली काविशें ईजाद करते हैं

चकबस्त ब्रिज नारायण

शिकन-अंदर-शिकन याद आ गया है

बुशरा ज़ैदी

अब के बरस भी महका महका ख़्वाब दरीचा लगता है

बुशरा ज़ैदी

सर-ए-दश्त दिल जो सराब था कोई ख़्वाब था

बुशरा हाश्मी

मोहब्बत में कोई सदमा उठाना चाहिए था

बुशरा एजाज़

सुलगती रेत में इक चेहरा आब सा चमका

बृजेश अम्बर

आसमाँ है समुंदर पे छाया हुआ

बृजेश अम्बर

ज़ौ-बार इसी सम्त हुए शम्स-ओ-क़मर भी

ब्रहमा नन्द जलीस

किसी के सितम इस क़दर याद आए

बिस्मिल सईदी

ये बुत फिर अब के बहुत सर उठा के बैठे हैं

बिस्मिल अज़ीमाबादी

सोचने का भी नहीं वक़्त मयस्सर मुझ को

बिस्मिल अज़ीमाबादी

निगाह-ए-क़हर होगी या मोहब्बत की नज़र होगी

बिस्मिल अज़ीमाबादी

ख़िज़ाँ जब तक चली जाती नहीं है

बिस्मिल अज़ीमाबादी

कहाँ आया है दीवानों को तेरा कुछ क़रार अब तक

बिस्मिल अज़ीमाबादी

मिल चुका महफ़िल में अब लुत्फ़-ए-शकेबाई मुझे

बिस्मिल इलाहाबादी

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