Ghazal Poetry (page 897)

हम क्या कहें कि आबला-पाई से क्या मिला

अब्दुल्लाह जावेद

हर लम्हा मर्ग-ओ-ज़ीस्त में पैकार देखना

अब्दुल्लाह जावेद

इक सैल-ए-बे-पनाह की सूरत रवाँ है वक़्त

अब्दुल्लाह जावेद

दुनिया ने जब डराया तो डरने में लग गया

अब्दुल्लाह जावेद

चाँदनी रात में हर दर्द सँवर जाता है

अब्दुल्लाह जावेद

चाँदनी का रक़्स दरिया पर नहीं देखा गया

अब्दुल्लाह जावेद

चमका जो चाँद रात का चेहरा निखर गया

अब्दुल्लाह जावेद

अश्क ढलते नहीं देखे जाते

अब्दुल्लाह जावेद

तुझ क़द की अदा सर्व-ए-गुलिस्ताँ सीं कहूँगा

अब्दुल वहाब यकरू

तेरा ही मैं गदा हूँ मेरा तू शाह बस है

अब्दुल वहाब यकरू

सुनाया यार नीं आ कर दो तारा

अब्दुल वहाब यकरू

शराब लाल-ए-लब-ए-दिल-बराँ है मुझ कूँ मुबाह

अब्दुल वहाब यकरू

मुझ सीं और दिलरुबा सीं है अन-बन

अब्दुल वहाब यकरू

मिरा दिल मुब्तला है झाँवली का

अब्दुल वहाब यकरू

मस्त अँखियाँ का देख दुम्बाला

अब्दुल वहाब यकरू

लोग हर-चंद पंद करते हैं

अब्दुल वहाब यकरू

क्यूँके करे न शहर को रो रो उजाड़ चश्म

अब्दुल वहाब यकरू

ख़ुश-क़दाँ जब ख़िराम करते हैं

अब्दुल वहाब यकरू

कब करे क़स्द यार आवन का

अब्दुल वहाब यकरू

जब करें मुझ तिरे का ख़्याल अँखियाँ

अब्दुल वहाब यकरू

इश्क़ है इश्क़-ए-पाक-बाज़ी का

अब्दुल वहाब यकरू

इस तरह रुख़ फेरते हो सुनते ही बोसे की बात

अब्दुल वहाब यकरू

गुदाज़-ए-आतिश-ए-ग़म सीं हुई हैं बावली अँखियाँ

अब्दुल वहाब यकरू

गल को शर्मिंदा कर ऐ शोख़ गुलिस्तान में आ

अब्दुल वहाब यकरू

अगर वो गुल-बदन दरिया नहाने बे-हिजाब आवे

अब्दुल वहाब यकरू

अगर नहीं क़स्द ऐ ज़ालिम मिरे दिल के सताने का

अब्दुल वहाब यकरू

ये सानेहा भी हो गया है रस्ते में

अब्दुल वहाब सुख़न

साकिन है कोई और वतन और किसी का

अब्दुल वहाब सुख़न

नई ग़ज़ल का नई फ़िक्र-ओ-आगही का वरक़

अब्दुल वहाब सुख़न

नए हैं वस्ल के मौसम मोहब्बतें भी नई

अब्दुल वहाब सुख़न