Friendship Poetry (page 84)

चाहिए इश्क़ में इस तरह फ़ना हो जाना

अहसन मारहरवी

अदा में बाँकपन अंदाज़ में इक आन पैदा कर

अहसन मारहरवी

अदा में बाँकपन अंदाज़ में इक आन पैदा कर

अहसन मारहरवी

अजीब कर्ब सा है ज़िंदगी के चेहरे पर

अहसन इमाम अहसन

अजीब कर्ब सा है ज़िंदगी के चेहरे पर

अहसन इमाम अहसन

मिला जो धूप का सहरा बदन शजर न बना

अहमद ज़िया

एहसास की मंज़िल से गुज़र जाएगा आख़िर

अहमद ज़िया

तरस रहा हूँ क़रार-ए-दिल-ओ-नज़र के लिए

अहमद ज़फ़र

फ़लक पे चाँद नहीं कोई अब्र-पारा नहीं

अहमद ज़फ़र

आप कहें तो गुलशन है

अहमद ज़फ़र

है वाहिमों का तमाशा यहाँ वहाँ देखो

अहमद शनास

अश्क भेजें मौज उभारें अब्र जारी कीजिए

अहमद शहरयार

ले के फिर ज़ख़्मों की सौग़ात बहारो आओ

अहमद शाहिद ख़ाँ

अजनबी लोग हैं मैं जिन में घिरा रहता हूँ

अहमद रिज़वान

बात करने का नहीं सामने आने का नहीं

अहमद रिज़वान

आता ही नहीं होने का यक़ीं क्या बात करूँ

अहमद रिज़वान

ब-वस्फ़-ए-शौक़ भी दिल का कहा नहीं करते

अहमद रियाज़

ब वस्फ़-ए-शौक़ भी दिल का कहा नहीं करते

अहमद रियाज़

ग़म-गुसारी

अहमद राही

तन्हाइयों के दश्त में अक्सर मिला मुझे

अहमद राही

क़याम-ए-दैर-ओ-तवाफ़-ए-हरम नहीं करते

अहमद राही

लम्हा लम्हा शुमार कौन करे

अहमद राही

कभी तिरी कभी अपनी हयात का ग़म है

अहमद राही

जिस राह से भी गुज़र गए हम

अहमद राही

दिल के सुनसान जज़ीरों की ख़बर लाएगा

अहमद राही

रूह लबों तक आ कर सोचे

अहमद नदीम क़ासमी

रेस्तोराँ

अहमद नदीम क़ासमी

दश्त-ए-वफ़ा

अहमद नदीम क़ासमी

यूँ तो पहने हुए पैराहन-ए-ख़ार आता हूँ

अहमद नदीम क़ासमी

उम्र भर उस ने इसी तरह लुभाया है मुझे

अहमद नदीम क़ासमी