Friendship Poetry (page 83)

हम को याद न आओ अब

अजीत सिंह हसरत

वो जो फूल थे तिरी याद के तह-ए-दस्त-ए-ख़ार चले गए

अजय सहाब

लगा के धड़कन में आग मेरी ब-रंग-ए-रक़्स-ए-शरर गया वो

अजय सहाब

फ़न जो मेआ'र तक नहीं पहुँचा

अजय सहाब

भूल पाए न तुझे आज भी रोने वाले

अजय सहाब

ढूँडते क्या हो इन आँखों में कहानी मेरी

ऐतबार साजिद

तू ही इंसाफ़ से कह जिस का ख़फ़ा यार रहे

ऐश देहलवी

फिरा किसी का इलाही किसी से यार न हो

ऐश देहलवी

मेरा शिकवा तिरी महफ़िल में अदू करते हैं

ऐश देहलवी

क्या हुए आशिक़ उस शकर-लब के

ऐश देहलवी

कुछ कम नहीं हैं शम्अ से दिल की लगन में हम

ऐश देहलवी

जुरअत ऐ दिल मय ओ मीना है वो ख़ुद-काम भी है

ऐश देहलवी

जो होता आह तिरी आह-ए-बे-असर में असर

ऐश देहलवी

जिस दिल में तिरी ज़ुल्फ़ का सौदा नहीं होता

ऐश देहलवी

दोस्त जब दिल सा आश्ना ही नहीं

ऐश देहलवी

आशिक़ों को ऐ फ़लक देवेगा तू आज़ार क्या

ऐश देहलवी

वहशत में दिल कितना कुशादा करना पड़ता है

ऐनुद्दीन आज़िम

मेरे हमराह सितारे कभी जुगनू निकले

ऐनुद्दीन आज़िम

जो मैं ने कह दिया उस से मुकरने वाला नहीं

ऐनुद्दीन आज़िम

न तीरगी के लिए हूँ न रौशनी के लिए

ऐन सलाम

मआल-ए-सोज़-ए-तलब था दिल-ए-तपाँ मालूम

अहसन रिज़वी दानापुरी

जिधर से वादी-ए-हैरत में हम गुज़रते हैं

अहसन रिज़वी दानापुरी

किसी माशूक़ का आशिक़ से ख़फ़ा हो जाना

अहसन मारहरवी

हमारा इंतिख़ाब अच्छा नहीं ऐ दिल तो फिर तू ही

अहसन मारहरवी

मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है

अहसन मारहरवी

क्यूँ चुप हैं वो बे-बात समझ में नहीं आता

अहसन मारहरवी

क्या ज़रूरत बे-ज़रूरत देखना

अहसन मारहरवी

जब तक अपने दिल में उन का ग़म रहा

अहसन मारहरवी

इक नज़र में दर्द खो देना दिल-ए-बीमार का

अहसन मारहरवी

दिल झुका माइल तबीअत हो गई

अहसन मारहरवी