Friendship Poetry (page 82)

नई तहज़ीब

अकबर इलाहाबादी

आम-नामा

अकबर इलाहाबादी

शेख़ ने नाक़ूस के सुर में जो ख़ुद ही तान ली

अकबर इलाहाबादी

फिर गई आप की दो दिन में तबीअ'त कैसी

अकबर इलाहाबादी

नई तहज़ीब से साक़ी ने ऐसी गर्म-जोशी की

अकबर इलाहाबादी

क्या जानिए सय्यद थे हक़ आगाह कहाँ तक

अकबर इलाहाबादी

ख़ुशी क्या हो जो मेरी बात वो बुत मान जाता है

अकबर इलाहाबादी

ख़ुशी है सब को कि ऑपरेशन में ख़ूब निश्तर ये चल रहा है

अकबर इलाहाबादी

ख़त्म किया सबा ने रक़्स गुल पे निसार हो चुकी

अकबर इलाहाबादी

जल्वा अयाँ है क़ुदरत-ए-परवरदिगार का

अकबर इलाहाबादी

जब यास हुई तो आहों ने सीने से निकलना छोड़ दिया

अकबर इलाहाबादी

इश्क़-ए-बुत में कुफ़्र का मुझ को अदब करना पड़ा

अकबर इलाहाबादी

गले लगाएँ करें प्यार तुम को ईद के दिन

अकबर इलाहाबादी

फ़लसफ़ी को बहस के अंदर ख़ुदा मिलता नहीं

अकबर इलाहाबादी

बहुत रहा है कभी लुत्फ़-ए-यार हम पर भी

अकबर इलाहाबादी

अपने पहलू से वो ग़ैरों को उठा ही न सके

अकबर इलाहाबादी

आज आराइ-ए-शगेसू-ए-दोता होती है

अकबर इलाहाबादी

ख़ुश-रंग किस क़दर ख़स-ओ-ख़ाशाक थे कभी

अकबर अली खान अर्शी जादह

दुखे दिलों पे जो पड़ जाए वो तबीब नज़र

अजमल सिद्दीक़ी

'अजमल' न आप सा भी कोई सख़्त-जाँ मिला

अजमल अजमली

याद-ए-फ़िराक-ए-यार तिरा शुक्रिया बहुत

अजमल अजमली

वक़्त-ए-सफ़र क़रीब है बिस्तर समेट लूँ

अजमल अजमली

शहर शहर ढूँड आए दर-ब-दर पुकार आए

अजमल अजमली

हर घड़ी रहता है अब ख़दशा मुझे

अजमल अजमली

फ़िरऔन-ए-वक़्त कोई भी हो सर-कशी करो

अजमल अजमली

जहाँ न दिल को सुकून है न है क़रार मुझे

आजिज़ मातवी

हर-सू जहाँ में शाम ओ सहर ढूँडते हैं हम

आजिज़ मातवी

हंगामा क्यूँ बपा है ज़रा बाम पर से देख

आजिज़ मातवी

जब मेरा घर बहिश्त सी गुल-वादियों में था

अजीत सिंह हसरत

इस चमन का अजीब माली है

अजीत सिंह हसरत