Friendship Poetry (page 80)
न वो ख़िज़ाँ रही बाक़ी न वो बहार रही
अख़्तर शीरानी
मिरी आँखों से ज़ाहिर ख़ूँ-फ़िशानी अब भी होती है
अख़्तर शीरानी
अगर वो अपने हसीन चेहरे को भूल कर बे-नक़ाब कर दे
अख़्तर शीरानी
आश्ना हो कर तग़ाफ़ुल आश्ना क्यूँ हो गए
अख़्तर शीरानी
यारान-ए-तेज़-गाम से रंजिश कहाँ है अब
अख़तर शाहजहाँपुरी
वक़्त बे-रहम है मक़्तल की ज़मीनों जैसा
अख़तर शाहजहाँपुरी
समुंदर सब के सब पायाब से हैं
अख़तर शाहजहाँपुरी
कहाँ से लाएँगे आँसू अज़ा-दारी के मौसम में
अख़तर शाहजहाँपुरी
अगर बुलंदी का मेरी वो ए'तिराफ़ करे
अख़तर शाहजहाँपुरी
तुम से छुट कर ज़िंदगी का नक़्श-ए-पा मिलता नहीं
अख़्तर सईद ख़ान
तिरी जबीं पे मिरी सुब्ह का सितारा है
अख़्तर सईद ख़ान
सफ़र ही शर्त-ए-सफ़र है तो ख़त्म क्या होगा
अख़्तर सईद ख़ान
मआल-ए-गर्दिश-ए-लैल-ओ-नहार कुछ भी नहीं
अख़्तर सईद ख़ान
ग़ुरूर-ए-पास-ए-रिवायत बदल के रख दूँगा
अख़्तर रज़ा अदील
पर्दा-ए-ज़ंगारी
अख़्तर पयामी
नश्तर से आरज़ू के दिल-ए-ज़िंदगी फ़िगार
अख़्तर ओरेनवी
दारू-ए-होश-रुबा नर्गिस-ए-बीमार तो हो
अख़्तर ओरेनवी
सिलसिला ज़ख़्म ज़ख़्म जारी है
अख़्तर नज़्मी
मुझ को मंज़ूर नहीं इश्क़ को रुस्वा करना
अख़तर मुस्लिमी
एक ही अंजाम है ऐ दोस्त हुस्न ओ इश्क़ का
अख़तर मुस्लिमी
शिकवा इस का तो नहीं है जो करम छोड़ दिया
अख़तर मुस्लिमी
कितने महबूब घरों से गए किस को मालूम
अख्तर लख़नवी
उदास कोहसार के नौहे
अख़्तर हुसैन जाफ़री
सुख़न दरमाँदा है
अख़्तर हुसैन जाफ़री
मिरी गली के मकीं ये मिरे रफ़ीक़-ए-सफ़र
अख़्तर होशियारपुरी
वो रतजगा था कि अफ़्सून-ए-ख़्वाब तारी था
अख़्तर होशियारपुरी
उफ़ुक़ उफ़ुक़ नए सूरज निकलते रहते हैं
अख़्तर होशियारपुरी
तिलिस्म-ए-गुम्बद-ए-बे-दर किसी पे वा न हुआ
अख़्तर होशियारपुरी
मेरे लहू में उस ने नया रंग भर दिया
अख़्तर होशियारपुरी
जो मुझ को देख के कल रात रो पड़ा था बहुत
अख़्तर होशियारपुरी