Friendship Poetry (page 79)
तेरे जमाल की दोशीज़गी की क़ौस-ए-क़ुज़ह
अलीम सबा नवेदी
बा'द मुद्दत के खुला जौहर-ए-नायाब मिरा
अलीम सबा नवेदी
दर्द बढ़ कर दवा न हो जाए
अलीम अख़्तर
विसाल-ए-यार की ख़्वाहिश में अक्सर
आलमताब तिश्ना
शिकस्त-ए-शीशा-ए-दिल की सदा हूँ
आलमताब तिश्ना
मिरी दस्तरस में है गर क़लम मुझे हुस्न-ए-फ़िक्र-ओ-ख़याल दे
आलमताब तिश्ना
किस किस से दोस्ती हुई ये ध्यान में नहीं
आलमताब तिश्ना
पीछे छूटे साथी मुझ को याद आ जाते हैं
आलम ख़ुर्शीद
ज़रा सी धूप ज़रा सी नमी के आने से
आलम ख़ुर्शीद
नए सिरे से कोई सफ़र आग़ाज़ नहीं करता
आलम ख़ुर्शीद
मैं जिधर जाऊँ मिरा ख़्वाब नज़र आता है
आलम ख़ुर्शीद
हम को लुत्फ़ आता है अब फ़रेब खाने में
आलम ख़ुर्शीद
हाथ पकड़ ले अब भी तेरा हो सकता हूँ मैं
आलम ख़ुर्शीद
हब्स-ए-दरूँ पे जिस्म-ए-गिराँ-बार संग था
अकरम नक़्क़ाश
ब-रंग-ए-ख़्वाब मैं बिखरा रहूँगा
अकरम नक़्क़ाश
ज़ख़्म देखे न मिरे ज़ख़्म की शिद्दत देखे
अकरम महमूद
आँख खुलने पे भी होता हूँ उसी ख़्वाब में गुम
अकरम महमूद
प्यार इश्क़ हमदर्दी और दोस्ती साज़िश
अकमल इमाम
यादें
अख़्तर-उल-ईमान
मेरा दोस्त अबुल-हौल
अख़्तर-उल-ईमान
मस्जिद
अख़्तर-उल-ईमान
एक एहसास
अख़्तर-उल-ईमान
बुलावा
अख़्तर-उल-ईमान
अहद-ए-वफ़ा
अख़्तर-उल-ईमान
वो कम-नसीब जो अहद-ए-जफ़ा में रहते हैं
अख़्तर ज़ियाई
मिला जो कोई यहाँ रम्ज़-आशना न मुझे
अख़्तर ज़ियाई
उस की चाह में नाम नहीं आने वाला
अख्तर शुमार
ओ देस से आने वाले बता
अख़्तर शीरानी
ज़मान-ए-हिज्र मिटे दौर-ए-वस्ल-ए-यार आए
अख़्तर शीरानी
यारो कू-ए-यार की बातें करें
अख़्तर शीरानी