Friendship Poetry (page 77)

ख़यालात रंगीं नहीं बोलते उस को ज्यूँ बास फूलों के रंगों में रहिए

अलीमुल्लाह

इश्क़ आ हम सूँ किया जब राम राम

अलीमुल्लाह

हुस्न का देख हर तरफ़ गुलज़ार

अलीमुल्लाह

ग़फ़लत में सोया अब तिलक फिर होवेगा होश्यार कब

अलीमुल्लाह

दिलबर को दिलबरी सूँ मना यार कर रखूँ

अलीमुल्लाह

'बहरी' पछाने नीं उसे गुल के सो वो दम-साज़ थे

अलीमुल्लाह

अक़्ल-ए-जुज़वी छोड़ कर ऐ यार फ़िक्र-ए-कुल करो

अलीमुल्लाह

अक़्ल को छोड़ इश्क़ में आ जा

अलीमुल्लाह

अजब चंचल मिला है यार हमना

अलीमुल्लाह

आया है मगर इश्क़ में दिलदार हमारा

अलीमुल्लाह

किस तरह जाऊँ कि ये आए हुए रात में हैं

अली ज़ुबैर

अदा-ए-इश्क़ हूँ पूरी अना के साथ हूँ मैं

अली ज़रयून

कहा था मैं ने क्या तू ने सुना क्या

अली वजदान

ऐ नीश-ए-इश्क़ तेरे ख़रीदार क्या हुए

अली वजदान

आतिश-ए-इश्क़ में जलता रहा बुझता रहा दिल

अली वजदान

शिकायतें भी बहुत हैं हिकायतें भी बहुत

अली सरदार जाफ़री

हाथों का तराना

अली सरदार जाफ़री

हसीन-तर

अली सरदार जाफ़री

एक ख़्वाब और

अली सरदार जाफ़री

दोस्ती का हाथ

अली सरदार जाफ़री

बहुत क़रीब हो तुम

अली सरदार जाफ़री

याद आए हैं अहद-ए-जुनूँ के खोए हुए दिल-दार बहुत

अली सरदार जाफ़री

याद आए हैं अहद-ए-जुनूँ के खोए हुए दिलदार बहुत

अली सरदार जाफ़री

वो मिरी दोस्त वो हमदर्द वो ग़म-ख़्वार आँखें

अली सरदार जाफ़री

वतन से दूर यारान-ए-वतन की याद आती है

अली सरदार जाफ़री

वही हुस्न-ए-यार में है वही लाला-ज़ार में है

अली सरदार जाफ़री

तुम्हारे ए'जाज़-ए-हुस्न की मेरे दिल पे लाखों इनायतें हैं

अली सरदार जाफ़री

शिकस्त-ए-शौक़ को तकमील-ए-आरज़ू कहिए

अली सरदार जाफ़री

लग़्ज़िश-ए-गाम लिए लग़्ज़िश-ए-मस्ताना लिए

अली सरदार जाफ़री

हम जो महफ़िल में तिरी सीना-फ़िगार आते हैं

अली सरदार जाफ़री