Friendship Poetry (page 75)
उलझा दिल-ए-सितम-ज़दा ज़ुल्फ़-ए-बुताँ से आज
अमानत लखनवी
रूह को राह-ए-अदम में मिरा तन याद आया
अमानत लखनवी
रवाँ दवाँ नहीं याँ अश्क चश्म-ए-तर की तरह
अमानत लखनवी
लुत्फ़ अब ज़ीस्त का ऐ गर्दिश-ए-अय्याम नहीं
अमानत लखनवी
ख़ाना-ए-ज़ंजीर का पाबंद रहता हूँ सदा
अमानत लखनवी
हैं जल्वा-ए-तन से दर-ओ-दीवार बसंती
अमानत लखनवी
गिर पड़े दाँत हुए मू-ए-सर ऐ यार सफ़ेद
अमानत लखनवी
आग़ोश में जो जल्वागर इक नाज़नीं हुआ
अमानत लखनवी
तज़्किरा देहली-ए-मरहूम का ऐ दोस्त न छेड़
अल्ताफ़ हुसैन हाली
दिल से ख़याल-ए-दोस्त भुलाया न जाएगा
अल्ताफ़ हुसैन हाली
आ रही है चाह-ए-यूसुफ़ से सदा
अल्ताफ़ हुसैन हाली
नशात-ए-उमीद
अल्ताफ़ हुसैन हाली
मुनाजात-ए-बेवा
अल्ताफ़ हुसैन हाली
मिट्टी का दिया
अल्ताफ़ हुसैन हाली
मर्सिया-ए-देहली-ए-मरहूम
अल्ताफ़ हुसैन हाली
हुब्ब-ए-वतन
अल्ताफ़ हुसैन हाली
कर के बीमार दी दवा तू ने
अल्ताफ़ हुसैन हाली
कब्क ओ क़ुमरी में है झगड़ा कि चमन किस का है
अल्ताफ़ हुसैन हाली
जुनूँ कार-फ़रमा हुआ चाहता है
अल्ताफ़ हुसैन हाली
जीते जी मौत के तुम मुँह में न जाना हरगिज़
अल्ताफ़ हुसैन हाली
इश्क़ को तर्क-ए-जुनूँ से क्या ग़रज़
अल्ताफ़ हुसैन हाली
हश्र तक याँ दिल शकेबा चाहिए
अल्ताफ़ हुसैन हाली
हक़ीक़त महरम-ए-असरार से पूछ
अल्ताफ़ हुसैन हाली
है ये तकिया तिरी अताओं पर
अल्ताफ़ हुसैन हाली
गो जवानी में थी कज-राई बहुत
अल्ताफ़ हुसैन हाली
दिल से ख़याल-ए-दोस्त भुलाया न जाएगा
अल्ताफ़ हुसैन हाली
दिल को दर्द-आश्ना किया तू ने
अल्ताफ़ हुसैन हाली
जुनून-ए-शौक़-ए-मोहब्बत की आगही देना
अलक़मा शिबली
मिरी क़ुर्बतों की ख़ातिर यूँही बे-क़रार होता
आलोक यादव
इक ज़रा सी चाह में जिस रोज़ बिक जाता हूँ मैं
आलोक यादव