Friendship Poetry (page 76)
भरे जो ज़ख़्म तो दाग़ों से क्यूँ उलझें?
आलोक यादव
मैं जो सर-ब-सज्दा हुआ कभी तो ज़मीं से आने लगी सदा
अल्लामा इक़बाल
अज़ाब-ए-दानिश-ए-हाज़िर से बा-ख़बर हूँ मैं
अल्लामा इक़बाल
ज़ौक़ ओ शौक़
अल्लामा इक़बाल
वालिदा मरहूमा की याद में
अल्लामा इक़बाल
तुलू-ए-इस्लाम
अल्लामा इक़बाल
तस्वीर-ए-दर्द
अल्लामा इक़बाल
शिकवा
अल्लामा इक़बाल
नाला-ए-फ़िराक़
अल्लामा इक़बाल
मस्जिद-ए-क़ुर्तुबा
अल्लामा इक़बाल
मार्च 1907
अल्लामा इक़बाल
जिब्रईल ओ इबलीस
अल्लामा इक़बाल
जवाब-ए-शिकवा
अल्लामा इक़बाल
इबलीस की मजलिस-ए-शूरा
अल्लामा इक़बाल
गोरिस्तान-ए-शाही
अल्लामा इक़बाल
अबुल-अला-म'अर्री
अल्लामा इक़बाल
न तख़्त-ओ-ताज में ने लश्कर-ओ-सिपाह में है
अल्लामा इक़बाल
न हो तुग़्यान-ए-मुश्ताक़ी तो मैं रहता नहीं बाक़ी
अल्लामा इक़बाल
ख़ुदी हो इल्म से मोहकम तो ग़ैरत-ए-जिब्रील
अल्लामा इक़बाल
ख़िरद ने मुझ को अता की नज़र हकीमाना
अल्लामा इक़बाल
हज़ार ख़ौफ़ हो लेकिन ज़बाँ हो दिल की रफ़ीक़
अल्लामा इक़बाल
गुलज़ार-ए-हस्त-ओ-बूद न बेगाना-वार देख
अल्लामा इक़बाल
अनोखी वज़्अ' है सारे ज़माने से निराले हैं
अल्लामा इक़बाल
यार के दरसन के ख़ातिर जान और तन भूल जा
अलीमुल्लाह
तालाब इरादे का भरे पल में लबालब
अलीमुल्लाह
यार के दरसन के ख़ातिर जान और तन भूल जा
अलीमुल्लाह
यार जब नैनों में आया हू-ब-हू
अलीमुल्लाह
पीतम के देखने के तमाशा को जाएँ चल
अलीमुल्लाह
ला-मकाँ लग आशिक़ाँ के इश्क़ का पर्वाज़ है
अलीमुल्लाह
लगा कर इश्क़ का कजरा नयन को
अलीमुल्लाह