Friendship Poetry (page 74)
वादा-ए-वस्ल और वो कुछ बात है
अमीर मीनाई
तीर पर तीर लगाओ तुम्हें डर किस का है
अमीर मीनाई
शमशीर है सिनाँ है किसे दूँ किसे न दूँ
अमीर मीनाई
साफ़ कहते हो मगर कुछ नहीं खुलता कहना
अमीर मीनाई
पूछा न जाएगा जो वतन से निकल गया
अमीर मीनाई
पिला साक़िया अर्ग़वानी शराब
अमीर मीनाई
न बेवफ़ाई का डर था न ग़म जुदाई का
अमीर मीनाई
मिरे बस में या तो या-रब वो सितम-शिआर होता
अमीर मीनाई
मैं रो के आह करूँगा जहाँ रहे न रहे
अमीर मीनाई
क्या रोके क़ज़ा के वार तावीज़
अमीर मीनाई
कुछ ख़ार ही नहीं मिरे दामन के यार हैं
अमीर मीनाई
कहा जो मैं ने कि यूसुफ़ को ये हिजाब न था
अमीर मीनाई
जब से बाँधा है तसव्वुर उस रुख़-ए-पुर-नूर का
अमीर मीनाई
हटाओ आइना उम्मीद-वार हम भी हैं
अमीर मीनाई
हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी
अमीर मीनाई
हैं न ज़िंदों में न मुर्दों में कमर के आशिक़
अमीर मीनाई
फ़िराक़-ए-यार ने बेचैन मुझ को रात भर रक्खा
अमीर मीनाई
दिल को तर्ज़-ए-निगह-ए-यार जताते आए
अमीर मीनाई
चाँद सा चेहरा नूर की चितवन माशा-अल्लाह माशा-अल्लाह
अमीर मीनाई
शाइ'र की दुनिया
अमीर औरंगाबादी
ख़त का इंतिज़ार
अमीर औरंगाबादी
तिरा ख़याल था लफ़्ज़ों में ढल गया कैसे
अमीर अहमद ख़ुसरव
तशन्नुज
अमीक़ हनफ़ी
बम्बई रात समुंदर
अमीक़ हनफ़ी
अब अनासिर में तवाज़ुन ढूँडने जाएँ कहाँ
अमीन राहत चुग़ताई
देख कोह-ए-ना-रसा बन कर भरम रक्खा तिरा
अमीन राहत चुग़ताई
इक अश्क सर-ए-शोख़ी-ए-रुख़सार में गुम है
अमीन अडीराई
मैं उसे देख रही हूँ बड़ी हैरानी से
अंबरीन हसीब अंबर
मुश्किल को समझने का वसीला निकल आता
अम्बर खरबंदा
जलते हुए जंगल से गुज़रना था हमें भी
अम्बर बहराईची