Friendship Poetry (page 73)
अपने हिस्से की अना दूँ तो अना दूँ किस को
अमित शर्मा मीत
दिल धड़कता है शब-ए-ग़म में कहीं ऐसा न हो
अमीरुल्लाह तस्लीम
बस कि थी रोने की आदत वस्ल में भी यार से
अमीरुल्लाह तस्लीम
वस्ल में बिगड़े बने यार के अक्सर गेसू
अमीरुल्लाह तस्लीम
शमीम-ए-यार न जब तक चमन में छू आए
अमीरुल्लाह तस्लीम
पारसाई उन की जब याद आएगी
अमीरुल्लाह तस्लीम
कल मिरा था आज वो बुत ग़ैर का होने लगा
अमीरुल्लाह तस्लीम
गर यही है आदत-ए-तकरार हँसते बोलते
अमीरुल्लाह तस्लीम
चाहता हूँ पहले ख़ुद-बीनी से मौत आए मुझे
अमीरुल्लाह तस्लीम
चारासाज़-ए-ज़ख़्म-ए-दिल वक़्त-ए-रफ़ू रोने लगा
अमीरुल्लाह तस्लीम
भूले से भी न जानिब-ए-अग़्यार देखना
अमीरुल्लाह तस्लीम
ख़्वाब जो बिखर गए
आमिर उस्मानी
ग़म-ए-बेहद में किस को ज़ब्त का मक़्दूर होता है
आमिर उस्मानी
दिल पे वो वक़्त भी किस दर्जा गिराँ होता है
आमिर उस्मानी
ए'तिबार-ए-शौक़ इक धोका सही
आमिर मौसवी
मीरास-ए-बे-बहा भी बचाई न जा सकी
अमीर हम्ज़ा साक़िब
ख़याल-ए-यार का सिक्का उछालने में गया
अमीर हम्ज़ा साक़िब
सुब्ह-ए-रौशन को अंधेरों से भरी शाम न दे
अमीता परसुराम 'मीता'
कोई ले ज़ोर की चुटकी तो है इंकार पोशीदा
अमीरुल इस्लाम हाशमी
यार क्या ज़िंदगी है सूरज की
अमीर क़ज़लबाश
पूछा है ग़ैर से मिरे हाल-ए-तबाह को
अमीर क़ज़लबाश
न पूछ मंज़र-ए-शाम-ओ-सहर पे क्या गुज़री
अमीर क़ज़लबाश
अपने हमराह ख़ुद चला करना
अमीर क़ज़लबाश
यार पहलू में है तन्हाई है कह दो निकले
अमीर मीनाई
तरफ़-ए-काबा न जा हज के लिए नादाँ है
अमीर मीनाई
कौन सी जा है जहाँ जल्वा-ए-माशूक़ नहीं
अमीर मीनाई
हटाओ आइना उम्मीद-वार हम भी हैं
अमीर मीनाई
है वसिय्यत कि कफ़न मुझ को इसी का देना
अमीर मीनाई
फ़िराक़-ए-यार ने बेचैन मुझ को रात भर रक्खा
अमीर मीनाई
बातें नासेह की सुनीं यार के नज़्ज़ारे किए
अमीर मीनाई