Friendship Poetry (page 72)

बड़ी फ़र्ज़-आश्ना है सबा करे ख़ूब काम हिसाब का

अंजुम इरफ़ानी

वा'दा है कि जब रोज़-ए-जज़ा आएगा

अंजुम आज़मी

बाग़ में रह के बहारों को निभाना होगा

अंजुम अंसारी

ऐ दो-जहाँ के मालिक आ'ला है नाम तेरा

अनीसा बेगम

लफ़्ज़ यूँ ख़ामुशी से लड़ते हैं

अनीस अब्र

हर एक पल मुझे दुख दर्द बे-शुमार मिले

अनीस अब्र

रू-ए-गुल चेहरा-ए-महताब नहीं देखते हैं

अनीस अशफ़ाक़

कब इश्क़ में यारों की पज़ीराई हुई है

अनीस अशफ़ाक़

फ़िराक़-ए-यार में कुछ कहिए समझाया नहीं जाता

अनीस अहमद अनीस

तख़य्युल को बरी करने लगा हूँ

अम्मार इक़बाल

रौशनी कम है

अमजद नजमी

तराना-ए-ग़म-ए-पिन्हाँ है हर ख़ुशी अपनी

अमजद नजमी

जो पूछते हैं कि ये इश्क़-ओ-आशिक़ी क्या है

अमजद नजमी

जब कोई लेता है मेरे सामने नाम-ए-ग़ज़ल

अमजद नजमी

अपनी हस्ती को यहाँ बे-मुद्दआ समझा था मैं

अमजद नजमी

शिकस्त-ए-अना

अमजद इस्लाम अमजद

ज़िंदगी दर्द भी दवा भी थी

अमजद इस्लाम अमजद

ये जो हासिल हमें हर शय की फ़रावानी है

अमजद इस्लाम अमजद

सदियाँ जिन में ज़िंदा हों वो सच भी मरने लगते हैं

अमजद इस्लाम अमजद

कितनी सरकश भी हो सर-फिरी ये हवा रखना रौशन दिया

अमजद इस्लाम अमजद

खेल उस ने दिखा के जादू के

अमजद इस्लाम अमजद

हुज़ूर-ए-यार में हर्फ़ इल्तिजा के रक्खे थे

अमजद इस्लाम अमजद

दूरियाँ सिमटने में देर कुछ तो लगती है

अमजद इस्लाम अमजद

दश्त-ए-दिल में सराब ताज़ा हैं

अमजद इस्लाम अमजद

दर-ए-काएनात जो वा करे उसी आगही की तलाश है

अमजद इस्लाम अमजद

ये लगता है अब भी कहीं कुछ बचा है

अमित शर्मा मीत

तेरी तस्वीरों को देख पिघलती हैं

अमित शर्मा मीत

सुनो यार इस की घुटन कुछ नहीं है

अमित शर्मा मीत

मुझ को पाने के सिवा और तमन्ना क्या है

अमित शर्मा मीत

जब जज़्बा इक बार जिगर में आता है

अमित शर्मा मीत