Friendship Poetry (page 81)
ये मोहब्बत की जवानी का समाँ है कि नहीं
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
यारों के इख़्लास से पहले दिल का मिरे ये हाल न था
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
शाइरो हद्द-ए-क़दामत से निकल कर देखो
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
नदीम बाग़ में जोश-ए-नुमू की बात न कर
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
न राज़-ए-इब्तिदा समझो न राज़-ए-इंतिहा समझो
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
कोशिश-ए-पैहम को सई-ए-राएगाँ कहते रहो
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
कैफ़ियत क्या थी यहाँ आलम-ए-ग़म से पहले
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
दूर तक रौशनी है ग़ौर से देख
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
यारों के इख़्लास से पहले दिल का मिरे ये हाल न था
अख़्तर अंसारी
सदा कुछ ऐसी मिरे गोश-ए-दिल में आती है
अख़्तर अंसारी
मोहब्बत करने वालों के बहार-अफ़रोज़ सीनों में
अख़्तर अंसारी
लुत्फ़ ले ले के पिए हैं क़दह-ए-ग़म क्या क्या
अख़्तर अंसारी
यहाँ मौसम भी बदलें तो नज़ारे एक जैसे हैं
अख़्तर अमान
जुस्तुजू ने तिरी हर चंद थका रक्खा है
अख़लाक़ बन्दवी
हम आज बज़्म-ए-रक़ीबाँ से सुर्ख़-रू आए
अख़लाक़ अहमद आहन
हँसना रोना पाना खोना मरना जीना पानी पर
अखिलेश तिवारी
वो हज़ार हम पे जफ़ा सही कोई शिकवा फिर भी रवा नहीं
अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी
ख़ुद नज़ारों पे नज़ारों को हँसी आती है
अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी
जुनून-ए-इश्क़ का जो कुछ हुआ अंजाम क्या कहिए
अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी
ख़्वाब आराम नहीं ख़्वाब परेशानी है
अकबर मासूम
ये कौन मेरी तिश्नगी बढ़ा बढ़ा के चल दिया
अकबर हैदराबादी
कई आवाज़ों की आवाज़ हूँ मैं
अकबर हमीदी
कहा था उस ने मोहब्बत की आबरू रखना
अकबर हमीदी
इक लम्हे ने जीवन-धारा रोक लिया
अकबर हमीदी
किस चमन की ख़ाक में फूलों का मुस्तक़बिल नहीं
अकबर हैदरी
तअल्लुक़ आशिक़ ओ माशूक़ का तो लुत्फ़ रखता था
अकबर इलाहाबादी
तहसीन के लायक़ तिरा हर शेर है 'अकबर'
अकबर इलाहाबादी
मुझ को तो देख लेने से मतलब है नासेहा
अकबर इलाहाबादी
हम क्या कहें अहबाब क्या कार-ए-नुमायाँ कर गए
अकबर इलाहाबादी
बताऊँ आप को मरने के बाद क्या होगा
अकबर इलाहाबादी