Friendship Poetry (page 91)

हम हैं ऐ यार चढ़ाए हुए पैमाना-ए-इश्क़

आग़ा हज्जू शरफ़

हुए ऐसे ब-दिल तिरे शेफ़्ता हम दिल-ओ-जाँ को हमेशा निसार किया

आग़ा हज्जू शरफ़

हुआ है तौर-ए-बर्बादी जो बे-दस्तूर पहलू में

आग़ा हज्जू शरफ़

हवस गुलज़ार की मिस्ल-ए-अनादिल हम भी रखते थे

आग़ा हज्जू शरफ़

घिसते घिसते पाँव में ज़ंजीर आधी रह गई

आग़ा हज्जू शरफ़

फ़स्ल-ए-गुल में है इरादा सू-ए-सहरा अपना

आग़ा हज्जू शरफ़

दिल को अफ़सोस-ए-जवानी है जवानी अब कहाँ

आग़ा हज्जू शरफ़

चलते हैं गुलशन-ए-फ़िरदौस में घर लेते हैं

आग़ा हज्जू शरफ़

आलम में हरे होंगे अश्जार जो मैं रोया

आग़ा हज्जू शरफ़

नौजवानी में अजब दिल की लगी होती है

अफ़ज़ल पेशावरी

वक़्त के तूफ़ानी सागर में क्रोध कपट के रेले हैं

अफ़ज़ल परवेज़

लैला सर-ब-गरेबाँ है मजनूँ सा आशिक़-ए-ज़ार कहाँ

अफ़ज़ल परवेज़

ये भी शायद ज़िंदगी की इक अदा है दोस्तो

अफ़ज़ल मिनहास

मैं फ़क़त इस जुर्म में दुनिया में रुस्वा हो गया

अफ़ज़ल मिनहास

कर्ब के शहर से निकले तो ये मंज़र देखा

अफ़ज़ल मिनहास

मैं ख़ुद भी यार तुझे भूलने के हक़ में हूँ

अफ़ज़ल ख़ान

शिकस्त-ए-ज़िंदगी वैसे भी मौत ही है ना

अफ़ज़ल ख़ान

राह भोला हूँ मगर ये मिरी ख़ामी तो नहीं

अफ़ज़ल ख़ान

कल अपने शहर की बस में सवार होते हुए

अफ़ज़ल ख़ान

मिसाल-ए-बर्ग किसी शाख़ से झड़े हुए हैं

अफ़ज़ल गौहर राव

हर नग़मा-ए-पुर-दर्द हर इक साज़ से पहले

अफ़ज़ल इलाहाबादी

अपनी तन्हाइयों के ग़ार में हूँ

अफ़ज़ल इलाहाबादी

अब तो हर एक अदाकार से डर लगता है

अफ़ज़ल इलाहाबादी

मैं ख़ाक में मिले हुए गुलाब देखता रहा

अफ़ज़ाल फ़िरदौस

ग़म का मौसम बीत गया सो रोना क्या

अफ़ज़ाल फ़िरदौस

पयाम-ए-आश्ती इक ढोंग दोस्ती का था

आफ़ताब शम्सी

घर ग़ैर के जो यार मिरा रात से गया

आफ़ताब शाह आलम सानी

मेरे गले से आन के प्यारा जो फिर लगे

आफ़ताब शाह आलम सानी

घर ग़ैर के जो यार मिरा रात से गया

आफ़ताब शाह आलम सानी

निगाह के लिए इक ख़्वाब भी ग़नीमत है

आफ़ताब हुसैन