Friendship Poetry (page 90)
मुझ को आता है तयम्मुम न वज़ू आता है
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
मिरे करीम इनायत से तेरी क्या न मिला
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
क्या कर रहे हो ज़ुल्म करो राह राह का
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
बुतों के वास्ते तो दीन-ओ-ईमाँ बेच डाले हैं
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
याद में तेरी जहाँ को भूलता जाता हूँ मैं
आग़ा हश्र काश्मीरी
चोरी कहीं खुले न नसीम-ए-बहार की
आग़ा हश्र काश्मीरी
ख़ल्वत-सरा-ए-यार में पहुँचेगा क्या कोई
आग़ा हज्जू शरफ़
कभी जो यार को देखा तो ख़्वाब में देखा
आग़ा हज्जू शरफ़
जश्न था ऐश-ओ-तरब की इंतिहा थी मैं न था
आग़ा हज्जू शरफ़
उड़ कर सुराग़-ए-कूचा-ए-दिलबर लगाइए
आग़ा हज्जू शरफ़
तीर-ए-नज़र से छिद के दिल-अफ़गार ही रहा
आग़ा हज्जू शरफ़
तिरछी नज़र न हो तरफ़-ए-दिल तो क्या करूँ
आग़ा हज्जू शरफ़
तिरी हवस में जो दिल से पूछा निकल के घर से किधर को चलिए
आग़ा हज्जू शरफ़
तिरे वास्ते जान पे खेलेंगे हम ये समाई है दिल में ख़ुदा की क़सम
आग़ा हज्जू शरफ़
तेरे आलम का यार क्या कहना
आग़ा हज्जू शरफ़
सलफ़ से लोग उन पे मर रहे हैं हमेशा जानें लिया करेंगे
आग़ा हज्जू शरफ़
रुलवा के मुझ को यार गुनहगार कर नहीं
आग़ा हज्जू शरफ़
रंग जिन के मिट गए हैं उन में यार आने को है
आग़ा हज्जू शरफ़
पुर-नूर जिस के हुस्न से मदफ़न था कौन था
आग़ा हज्जू शरफ़
परी-पैकर जो मुझ वहशी का पैराहन बनाते हैं
आग़ा हज्जू शरफ़
नाहक़ ओ हक़ का उन्हें ख़ौफ़-ओ-ख़तर कुछ भी नहीं
आग़ा हज्जू शरफ़
मौसम-ए-गुल में जो घिर घिर के घटाएँ आईं
आग़ा हज्जू शरफ़
लुटाते हैं वो बाग़-ए-इश्क़ जाए जिस का जी चाहे
आग़ा हज्जू शरफ़
किस के हाथों बिक गया किस के ख़रीदारों में हूँ
आग़ा हज्जू शरफ़
ख़ुदा-मालूम किस की चाँद से तस्वीर मिट्टी की
आग़ा हज्जू शरफ़
जो सामना भी कभी यार-ए-ख़ूब-रू से हुआ
आग़ा हज्जू शरफ़
जवानी आई मुराद पर जब उमंग जाती रही बशर की
आग़ा हज्जू शरफ़
जश्न था ऐश-ओ-तरब की इंतिहा थी मैं न था
आग़ा हज्जू शरफ़
जब से हुआ है इश्क़ तिरे इस्म-ए-ज़ात का
आग़ा हज्जू शरफ़
इश्क़-ए-दहन में गुज़री है क्या कुछ न पूछिए
आग़ा हज्जू शरफ़