Heart Broken Poetry (page 160)
तौक़ीर अँधेरों की बढ़ा दी गई शायद
एहतराम इस्लाम
सुर्ख़ मौसम की कहानी है पुरानी हो न हो
एहतराम इस्लाम
मुंतशिर हर शय क़रीने से सजा दी जाएगी
एहतराम इस्लाम
हादसों का सिलसिला मंज़र-ब-मंज़र जम गया
एहतराम इस्लाम
हादसों का सिलसिला मंज़र-ब-मंज़र जम गया
एहतराम इस्लाम
ग़ैज़ का सूरज था सर पर सच को सच कहता तो कौन
एहतराम इस्लाम
ग़ैज़ का सूरज था सर पर सच को सच कहता तो कौन
एहतराम इस्लाम
फ़ज़ा-ए-शाम ज़िया-ए-सहर उसी से मिली
एहतराम इस्लाम
फ़ज़ा-ए-शाम ज़िया-ए-सहर उसी से मिली
एहतराम इस्लाम
ढूँड साया न शजर आगे भी
एहतराम इस्लाम
ढूँड साया न शजर आगे भी
एहतराम इस्लाम
बज़्म-ए-तन्हाई में अक्स-ए-शो'ला-पैकर था कोई
एहतराम इस्लाम
याद आई जब मुझे 'फ़रहत' से छोटी थी बहन
एहसान साक़िब
ज़िंदगी इक आग है वो आग जलना चाहिए
एहसान जाफ़री
ज़ख़्मों को मेरे दिल के सजाओ तो बने बात
एहसान जाफ़री
तुम अच्छे मसीहा हो दवा क्यूँ नहीं देते
एहसान जाफ़री
जज़्बात की शिद्दत से निखरता है बयाँ और
एहसान जाफ़री
बड़ी मुश्किलों से काटा बड़े कर्ब से गुज़ारा
एहसान दरबंगावी
याद तेरी जो कभी आती है बहलाने को
एहसान दरबंगावी
ख़याल के फूल खिल रहे हैं बहार के गीत गा रहा हूँ
एहसान दरबंगावी
बात अब आई समझ में कि हक़ीक़त क्या थी
एहसान दरबंगावी
न जाने मोहब्बत का अंजाम क्या है
एहसान दानिश
किसे ख़बर थी कि ये दौर-ए-ख़ुद-ग़रज़ इक दिन
एहसान दानिश
ख़ाक से सैंकड़ों उगे ख़ुर्शीद
एहसान दानिश
आज उस ने हँस के यूँ पूछा मिज़ाज
एहसान दानिश
यूँ उस पे मिरी अर्ज़-ए-तमन्ना का असर था
एहसान दानिश
यूँ न मिल मुझ से ख़फ़ा हो जैसे
एहसान दानिश
वफ़ा का अहद था दिल को सँभालने के लिए
एहसान दानिश
तौबा की नाज़िशों पे सितम ढा के पी गया
एहसान दानिश
सोज़-ए-जुनूँ को दिल की ग़िज़ा कर दिया गया
एहसान दानिश