Heart Broken Poetry (page 410)

अब धनक के रंग भी उन को भले लगते नहीं

आल-ए-अहमद सूरूर

आज पी कर भी वही तिश्ना-लबी है साक़ी

आल-ए-अहमद सूरूर

आज पी कर भी वही तिश्ना-लबी है साक़ी

आल-ए-अहमद सूरूर

ज़ंजीर से जुनूँ की ख़लिश कम न हो सकी

आल-ए-अहमद सूरूर

ये दौर मुझ से ख़िरद का वक़ार माँगे है

आल-ए-अहमद सूरूर

वो जिएँ क्या जिन्हें जीने का हुनर भी न मिला

आल-ए-अहमद सूरूर

वो एहतियात के मौसम बदल गए कैसे

आल-ए-अहमद सूरूर

तू पयम्बर सही ये मो'जिज़ा काफ़ी तो नहीं

आल-ए-अहमद सूरूर

सियाह रात की सब आज़माइशें मंज़ूर

आल-ए-अहमद सूरूर

शगुफ़्तगी-ए-दिल-ए-वीराँ में आज आ ही गई

आल-ए-अहमद सूरूर

सफ़र तवील सही हासिल-ए-सफ़र क्या था

आल-ए-अहमद सूरूर

नवा-ए-शौक़ में शोरिश भी है क़रार भी है

आल-ए-अहमद सूरूर

लोग तन्हाई का किस दर्जा गिला करते हैं

आल-ए-अहमद सूरूर

लो अँधेरों ने भी अंदाज़ उजालों के लिए

आल-ए-अहमद सूरूर

कुछ लोग तग़य्युर से अभी काँप रहे हैं

आल-ए-अहमद सूरूर

ख़्वाबों से यूँ तो रोज़ बहलते रहे हैं हम

आल-ए-अहमद सूरूर

ख़ुश्क खेती है मगर उस को हरी कहते हैं

आल-ए-अहमद सूरूर

ख़ुदा-परस्त मिले और न बुत-परस्त मिले

आल-ए-अहमद सूरूर

ख़याल जिन का हमें रोज़-ओ-शब सताता है

आल-ए-अहमद सूरूर

जिस ने किए हैं फूल निछावर कभी कभी

आल-ए-अहमद सूरूर

जब्र-ए-हालात का तो नाम लिया है तुम ने

आल-ए-अहमद सूरूर

जब कभी बात किसी की भी बुरी लगती है

आल-ए-अहमद सूरूर

हम न इस टोली में थे यारो न उस टोली में थे

आल-ए-अहमद सूरूर

हर इक जन्नत के रस्ते हो के दोज़ख़ से निकलते हैं

आल-ए-अहमद सूरूर

हमें तो मय-कदे का ये निज़ाम अच्छा नहीं लगता

आल-ए-अहमद सूरूर

हमारे हाथ में जब कोई जाम आया है

आल-ए-अहमद सूरूर

ग़ैरत-ए-इश्क़ का ये एक सहारा न गया

आल-ए-अहमद सूरूर

फ़ुग़ान-ए-दर्द में भी दर्द की ख़लिश ही नहीं

आल-ए-अहमद सूरूर

दिल-दादगान-ए-लज़्ज़त-ए-ईजाद क्या करें

आल-ए-अहमद सूरूर

दास्तान-ए-शौक़ कितनी बार दोहराई गई

आल-ए-अहमद सूरूर