Heart Broken Poetry (page 234)

यूँही बैठे रहो बस दर्द-ए-दिल से बे-ख़बर हो कर

असरार-उल-हक़ मजाज़

ये तीरगी-ए-शब ही कुछ सुब्ह-तराज़ आती

असरार-उल-हक़ मजाज़

ये मेरी दुनिया ये मेरी हस्ती

असरार-उल-हक़ मजाज़

ये जहाँ बारगह-ए-रित्ल-ए-गिराँ है साक़ी

असरार-उल-हक़ मजाज़

वो नक़ाब आप से उठ जाए तो कुछ दूर नहीं

असरार-उल-हक़ मजाज़

तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई वो सई-ए-करम फ़रमा भी गए

असरार-उल-हक़ मजाज़

शौक़ के हाथों ऐ दिल-ए-मुज़्तर क्या होना है क्या होगा

असरार-उल-हक़ मजाज़

साज़गार है हमदम इन दिनों जहाँ अपना

असरार-उल-हक़ मजाज़

सारा आलम गोश-बर-आवाज़ है

असरार-उल-हक़ मजाज़

साक़ी-ए-गुलफ़ाम बा-सद एहतिमाम आ ही गया

असरार-उल-हक़ मजाज़

रुख़्सत ऐ हम-सफ़रो शहर-ए-निगार आ ही गया

असरार-उल-हक़ मजाज़

परतव-ए-साग़र-ए-सहबा क्या था

असरार-उल-हक़ मजाज़

निगाह-ए-लुत्फ़ मत उठ ख़ूगर-ए-आलाम रहने दे

असरार-उल-हक़ मजाज़

न हम-आहंग-ए-मसीहा न हरीफ़-ए-जिब्रील

असरार-उल-हक़ मजाज़

कुछ तुझ को ख़बर है हम क्या क्या ऐ शोरिश-ए-दौराँ भूल गए

असरार-उल-हक़ मजाज़

ख़ुद दिल में रह के आँख से पर्दा करे कोई

असरार-उल-हक़ मजाज़

ख़ामुशी का तो नाम होता है

असरार-उल-हक़ मजाज़

करिश्मा-साजी-ए-दिल देखता हूँ

असरार-उल-हक़ मजाज़

कमाल-ए-इश्क़ है दीवाना हो गया हूँ मैं

असरार-उल-हक़ मजाज़

इज़्न-ए-ख़िराम लेते हुए आसमाँ से हम

असरार-उल-हक़ मजाज़

हुस्न फिर फ़ित्नागर है क्या कहिए

असरार-उल-हक़ मजाज़

हुस्न को बे-हिजाब होना था

असरार-उल-हक़ मजाज़

दर्द की दौलत-ए-बेदार अता हो साक़ी

असरार-उल-हक़ मजाज़

दामन-ए-दिल पे नहीं बारिश-ए-इल्हाम अभी

असरार-उल-हक़ मजाज़

बर्बाद-ए-तमन्ना पे इताब और ज़ियादा

असरार-उल-हक़ मजाज़

ऐश से बे-नियाज़ हैं हम लोग

असरार-उल-हक़ मजाज़

आसमाँ तक जो नाला पहुँचा है

असरार-उल-हक़ मजाज़

आशिक़ी जाँ-फ़ज़ा भी होती है

असरार-उल-हक़ मजाज़

आओ अब मिल के गुलिस्ताँ को गुल्सिताँ कर दें

असरार-उल-हक़ मजाज़

ठहरे तो कहाँ ठहरे आख़िर मिरी बीनाई

असरारुल हक़ असरार