Heart Broken Poetry (page 232)

ख़्वाब की दिल्ली

अता आबिदी

तुझ को ख़िफ़्फ़त से बचा लूँ पानी

अता आबिदी

तीरगी शम्अ बनी राहगुज़र में आई

अता आबिदी

तमाशा ज़िंदगी का रोज़ ओ शब है

अता आबिदी

सर पे सूरज हो मगर साया न हो ऐसा न था

अता आबिदी

साँसों के तआक़ुब में हैरान मिली दुनिया

अता आबिदी

पस-ए-दीवार हुज्जत किस लिए है

अता आबिदी

कोई भी ख़ुश नहीं है इस ख़बर से

अता आबिदी

तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई वो सई-ए-करम फ़रमा भी गए

असरार-उल-हक़ मजाज़

रूदाद-ए-ग़म-ए-उल्फ़त उन से हम क्या कहते क्यूँकर कहते

असरार-उल-हक़ मजाज़

क्यूँ जवानी की मुझे याद आई

असरार-उल-हक़ मजाज़

हुस्न को शर्मसार करना ही

असरार-उल-हक़ मजाज़

हिज्र में कैफ़-ए-इज़्तिराब न पूछ

असरार-उल-हक़ मजाज़

ज़हराब-ए-हुस्न

असरार-उल-हक़ मजाज़

वतन-आशोब

असरार-उल-हक़ मजाज़

तिफ़्ली के ख़्वाब

असरार-उल-हक़ मजाज़

तआरुफ़

असरार-उल-हक़ मजाज़

शिकवा-ए-मुख़्तसर

असरार-उल-हक़ मजाज़

शौक़-ए-गुरेज़ाँ

असरार-उल-हक़ मजाज़

शरारे

असरार-उल-हक़ मजाज़

शहर-ए-निगार

असरार-उल-हक़ मजाज़

सरमाया-दारी

असरार-उल-हक़ मजाज़

सानेहा

असरार-उल-हक़ मजाज़

रात और रेल

असरार-उल-हक़ मजाज़

पर्दा और इस्मत

असरार-उल-हक़ मजाज़

पहला जश्न-ए-आज़ादी

असरार-उल-हक़ मजाज़

नुमाइश में

असरार-उल-हक़ मजाज़

नज़्र-ए-दिल

असरार-उल-हक़ मजाज़

नज़्र-ए-अलीगढ़

असरार-उल-हक़ मजाज़

नौ-जवान से

असरार-उल-हक़ मजाज़