Heart Broken Poetry (page 231)
आँसू तुम्हारी आँख में आए तो उठ गए
अताउर्रहमान जमील
वैसे तो इस घर को उस ने चाहे कम ख़ुश-हाली दी
अताउल हसन
तुम्हारे हिज्र का सदक़ा उतार फेंकता है
अताउल हसन
किसी और को मैं तिरे सिवा नहीं चाहता
अताउल हसन
फ़ाख़्ता शाख़ से उड़ते हुए घबराई थी
अताउल हसन
दिलों से ख़ौफ़ निकलता नहीं अज़ाबों का
अताउल हक़ क़ासमी
वो एक शख़्स कि मंज़िल भी रास्ता भी है
अताउल हक़ क़ासमी
वह एक शख़्स कि मंज़िल भी रास्ता भी है
अताउल हक़ क़ासमी
वो दश्त-ए-कर्ब-ओ-बला में उतरने देता नहीं
अताउल हक़ क़ासमी
मंज़िलें भी ये शिकस्ता-बाल-ओ पर भी देखना
अताउल हक़ क़ासमी
भटक रही है 'अता' ख़ल्क़-ए-बे-अमाँ फिर से
अताउल हक़ क़ासमी
भटक रही है 'अता' ख़ल्क़-ए-बे-अमाँ फिर से
अताउल हक़ क़ासमी
तूफ़ान-ए-बहर ख़ाक डराता मुझे 'तुराब'
अता तुराब
क्या क्या न प्यास जागे मिरे दिल के दश्त में
अता तुराब
तन्हाइयों के दश्त में भागे जो रात भर
अता तुराब
रात वहशत से गुरेज़ाँ था मैं आहू की तरह
अता तुराब
मेहनत से मिल गया जो दफ़ीने के बीच था
अता तुराब
कब कहाँ क्या मिरे दिलदार उठा लाएँगे
अता तुराब
दर्द की धूप में सहरा की तरह साथ रहे
अता शाद
ज़िंदगी आईना है आईना-आराई है
अता शाद
यक लम्हा सही उम्र का अरमान ही रह जाए
अता शाद
पारसाओं ने बड़े ज़र्फ़ का इज़हार किया
अता शाद
मैं ज़ख़्म ज़ख़्म रहूँ रूह के ख़राबों से
अता शाद
गहरी है शब की आँच कि ज़ंजीर-ए-दर कटे
अता शाद
दिलों के दर्द जगा ख़्वाहिशों के ख़्वाब सजा
अता शाद
चोब-ए-सहरा भी वहाँ रश्क-ए-समर कहलाए
अता शाद
चोब-ए-सहरा भी वहाँ रश्क-ए-समर कहलाए
अता शाद
बड़ा कठिन है रास्ता जो आ सको तो साथ दो
अता शाद
कोई भी ख़ुश नहीं है इस ख़बर से
अता आबिदी
किसी के जिस्म-ओ-जाँ छलनी किसी के बाल-ओ-पर टूटे
अता आबिदी