Heart Broken Poetry (page 229)
कभी साया है कभी धूप मुक़द्दर मेरा
अतहर नफ़ीस
इतने दिन के बाद तू आया है आज
अतहर नफ़ीस
हम भी बदल गए तिरी तर्ज़-ए-अदा के साथ साथ
अतहर नफ़ीस
फ़र्ज़ानों की इस बस्ती में एक अजब सौदाई है
अतहर नफ़ीस
दिल की मसर्रतें नई जाँ का मलाल है नया
अतहर नफ़ीस
दम-ब-दम बढ़ रही है ये कैसी सदा शहर वालो सुनो
अतहर नफ़ीस
'अतहर' तुम ने इश्क़ किया कुछ तुम भी कहो क्या हाल हुआ
अतहर नफ़ीस
मैं कि ख़ुद अपने ख़यालात का ज़िंदानी हूँ
अतहर नादिर
किस दर्जा मिरे शहर की दिलकश है फ़ज़ा भी
अतहर नादिर
करता मैं अब किसी से कोई इल्तिमास क्या
अतहर नादिर
दिल तो बरसाता है हर रोज़ ही ग़म के सावन
अतहर अज़ीज़
मोहब्बत की मंज़िल
अतीया दाऊद
काश समझदार न बनूँ
अतीया दाऊद
अपनी बेटी के नाम
अतीया दाऊद
फिर सदा-ए-मोहब्बत सुनी है अभी
अतीक़ुर्रहमान सफ़ी
मिरी मुश्किल अगर आसाँ बना देते तो अच्छा था
अतीक़ुर्रहमान सफ़ी
कोई नहीं हमारा पुर्सान-ए-हाल अब के
अतीक़ुर्रहमान सफ़ी
जिस को चाहा था कब मिला मुझ को
अतीक़ुर्रहमान सफ़ी
अन-गिनत अज़ाब हैं रतजगों के दरमियाँ
अतीक़ुर्रहमान सफ़ी
कटी है उम्र यहाँ एक घर बनाने में
अतीक़ मुज़फ़्फ़रपुरी
दिल लगाना चाहिए चल कर किसी हैवान से
अतीक़ मुज़फ़्फ़रपुरी
अल्फ़ाज़ न दे पाएँ अगर साथ बयाँ का
अतीक़ मुज़फ़्फ़रपुरी
आसमाँ गर्दिश में था सारी ज़मीं चक्कर में थी
अतीक़ मुज़फ़्फ़रपुरी
मसर्रत और ग़म दोनों की कोई हद ज़रूरी है
अतीक़ असर
शिकायत है बहुत लेकिन गिला अच्छा नहीं लगता
अतीक़ असर
क़रीब से न गुज़र इंतिज़ार बाक़ी रख
अतीक़ असर
मैं तुम से तर्क-ए-तअल्लुक की बात क्यूँ सोचूँ
अतीक़ अंज़र
दूर मुझ से रहते हैं सारे ग़म ज़माने के
अतीक़ अंज़र
उदास बैठा दिए ज़ख़्म के जलाए हुए
अतीक़ अंज़र
सुलगती रेत की क़िस्मत में दरिया लिख दिया जाए
अतीक़ अंज़र