Heart Broken Poetry (page 228)
यही बहुत है कि अहबाब पूछ लेते हैं
अतहर नासिक
सफ़र भी जब्र है नाचार करना पड़ता है
अतहर नासिक
पल-दो-पल है फिर ये सोना मिट्टी का
अतहर नासिक
पहुँचा दिया उमीद को तूफ़ान-ए-यास तक
अतहर नासिक
मैं तुझे भूलना चाहूँ भी तो ना-मुम्किन है
अतहर नासिक
ख़ुद को किसी की राह-गुज़र किस लिए करें
अतहर नासिक
ख़ुद को किसी की राहगुज़र किस लिए करें
अतहर नासिक
गूँगों को ज़बान किस ने दी है
अतहर नासिक
चुप-चाप हब्स-ए-वक़्त के पिंजरे में मर गया
अतहर नासिक
अगर यक़ीन न रखते गुमान तो रखते
अतहर नासिक
ये धूप तो हर रुख़ से परेशाँ करेगी
अतहर नफ़ीस
कभी साया है कभी धूप मुक़द्दर मेरा
अतहर नफ़ीस
जी न सकूँ मैं जिस के बग़ैर
अतहर नफ़ीस
हमारे इश्क़ में रुस्वा हुए तुम
अतहर नफ़ीस
इक शक्ल हमें फिर भाई है इक सूरत दिल में समाई है
अतहर नफ़ीस
इक आग ग़म-ए-तन्हाई की जो सारे बदन में फैल गई
अतहर नफ़ीस
वो इश्क़ जो हम से रूठ गया अब उस का हाल बताएँ क्या
अतहर नफ़ीस
वो दौर क़रीब आ रहा है
अतहर नफ़ीस
तू मिला था और मेरे हाल पर रोया भी था
अतहर नफ़ीस
सोचते और जागते साँसों का इक दरिया हूँ मैं
अतहर नफ़ीस
साया मेरा साया वो
अतहर नफ़ीस
सौ रंग है किस रंग से तस्वीर बनाऊँ
अतहर नफ़ीस
रौनक़-ए-बेश-ओ-कम किस के होने से है
अतहर नफ़ीस
फिर कोई नया ज़ख़्म नया दर्द अता हो
अतहर नफ़ीस
न शाम है न सवेरा अजब दयार में हूँ
अतहर नफ़ीस
न मंज़िल हूँ न मंज़िल-आश्ना हूँ
अतहर नफ़ीस
मिस्ल-ए-बाद-ए-सबा तेरे कूचे में ऐ जान-ए-जाँ आए हैं
अतहर नफ़ीस
लम्हों के अज़ाब सह रहा हूँ
अतहर नफ़ीस
क्या वक़्त पड़ा है तिरे आशुफ़्ता-सरों पर
अतहर नफ़ीस
क्या बात निराली है मुझ में किस फ़न में आख़िर यकता हूँ
अतहर नफ़ीस